E-Waste Kya Hai

E-Waste Kya Hai. बदलते हुए जमाने में इतने सारे electronic products बाजार में उपलब्ध हैं की आप खरीदते हुए थक जाएंगे। आप खुद सोचिए की आज तक आपके घर में कितने सारे electric devices खरीदे जा चुके हैं। और उसमें से कितने अभी तक ठीक से काम कर रहे हैं।

आपके जो device खराब हो गए उनका आपने क्या किया। आपने उसे फेंक दिया होगा और उसके बाद उसका क्या हुआ ये तो आपको बिल्कुल भी पता नहीं होगा। यहीं से ई-कचरा का जन्म होता है। इसलिए हम इस लेख में जानेंगे की ई-कचरा क्या होता है और इससे हमारे वातावरण पर क्या असर होता है।

ई-कचरा में कुछ ऐसे खतरनाक तत्व होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होते हैं और इनसे काफी खतरनाक बीमारियाँ भी होती हैं। इसलिए ई-कचरा कम करने के तरीकों के बारे में भी जानेंगे।

ई-कचरा क्या है- e waste in Hindi

जब कोई electronic device खराब हो जाता है और वो काम के लायक नहीं रह जाता तो उसे ई-कचरा कहा जाता है। अंग्रेजी में इसे e-waste के नाम से जाना जाता है। e-waste का full फॉर्म होता है electronic waste.

कभी-कभी आपका device बिना खराब हुए भी ई-कचरा बन जाता है जब आप उसे खराब होने से पहले ही फेंक देते हैं। ऐसा तब होता है जब उस तरह का नया product उससे अधिक features के साथ मार्केट में आता है। तब आप पुराना product खराब होने से पहले ही उसे फेंक देते हैं और इससे ई-कचरा उत्पन्न होता है।

ये ई-कचरा प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है और ये हमारे वातावरण और स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसान दायक है। इसमें lead, cadmium, beryllium जैसे खतरनाक तत्व पाए जाते हैं जिनसे काफी घातक बीमारियां हो सकती हैं। इन ई-कचरा को व्यस्थित तरीके से इकट्ठा कर उसे recycle करके उसका reuse करके इन नुकसान से बचा जा सकता है।

E-Waste Kya Hai – cause of e-waste

ई-कचरा का कारण बढ़ती technology और उसका अधिक इस्तेमाल होना है। जैसे-जैसे दुनिया में विकास बढ़ रहा है वैसे ही electronic device का इस्तेमाल बढ़ रहा है ठीक इसी के अनुपात में ई-कचरा भी बढ़ रहा है। ई-कचरा बढ़ने के कारण नीचे दिए गए हैं और साथ ही इनके बारे में संक्षेप में बताया भी गया है।

E-Waste Kya Hai – technology

E-Waste Kya Hai, तकनीक बढ़ने से नए-नए प्रकार के electronic gadgets और devices का निर्माण किया जा रहा है और उसे मार्केट में लाया जा रहा है। इससे उनकी संख्या बढ़ रही है और जब यही devices खराब हो जाते हैं तो ई-कचरा के रूप में हमारे सामने हैं।

जैसे की इस समय लगभग हर व्यक्ति के पास मोबाईल फोन है। इसके अलावा तकनीक और विकसित होने से स्मार्ट वाच और अन्य बहुत सारे स्मार्ट डिवाइसेस हर साल मार्केट में आते रहते हैं।

लोगों के शौक – people’s wish

कुछ लोगों के शौक की वजह से भी ई-कचरा की वृद्धि हो रही है। जिनके पास अच्छा खासा पैसा है उनमें से कुछ लोग एक ही काम करने वाला एक से अधिक डिवाइस रखने के शौकीन होते हैं। जैसे की उनके पास पहले से स्मार्टफोन हो तब भी वो उससे बोर होने पर नया खरीद लेते हैं जबकि पुराना स्मार्टफोन और भी दिन आराम से चल सकता था।


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E-Waste Kya Hai – Development

E-Waste Kya Hai, जैसे-जैसे विकास बढ़ रहा है वैसे-वैसे नए उपकरण बन रहे हैं और खराब होने पर ई-कचरा की वृद्धि कर रहे हैं। हर जगह इंसान की जगह मशीनों से काम लिया जा रहा है। ऐसे में लोग बेरोजगार हो रहे हैं और उनका काम मशीनें कर रही हैं।

यदि बस मोबाईल और कंप्युटर की ही बात कर ली जाए तो ये दुनियाभर में सबसे ज्यादा ई-कचरा उत्पन्न करने वाले हैं। यदि समय रहते इसे कम नहीं किया गया तो हमारे वातावरण पर इसका काफी खतरनाक असर देखने को मिलेगा।



Electronic device का समय से पहले टूट या फूट जाना

हर electronic device की एक life span होती है यानि की वो डिवाइस लगभग कितने समय तक चलेगा। लेकिन कभी-कभी दुर्घटना वश ये समय से पहले टूट या फूट जाएं और उसमें काफी क्षति हो जाए तो ये भी ई-कचरा की वृद्धि करती हैं।

जैसे की स्मार्टफोन का अधिक ऊंचाई से गिर जाना, किसी अन्य भारी वस्तु का इलेक्ट्रिक डिवाइस पर गिर जाना आदि। चूंकि ये devices एलेक्ट्रिक होते हैं और ये बिजली से चलते हैं इसलिए यदि कभी बिजली का पावर बहुत अधिक हो जाए तो इससे भी इन devices को क्षति पहुँचती है और ये पूरी तरह खराब हो सकते हैं।  

E-Waste Kya Hai – lack of awareness

E-Waste Kya Hai, असल में लोग ई-कचरा और इससे होने वाले नुकसान से अनजान हैं और इसलिए इसे कहीं भी फेंक देते हैं। इतना ही नहीं जहां इसकी recycling होती हैं वहाँ भी इससे होने वाले नुकसान को नजरंदाज किया जाता है। इस क्षेत्र में काम करने वाले लेबर के लिए ठीक तरह से सुरक्षा व्यवस्था भी नहीं है।

सबसे पहले लोगों को ये बताना होगा की ई-कचरा को इधर-उधर फेंकने से हमारे वातावरण और हमारे स्वस्थ्य को क्या नुकसान होने वाला है। उसके बाद उन्हें ई-कचरा घर में इसे पहुँचाने के लिए प्रेरित करें जहां से इसकी recycling करके फिर से उसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

ई-कचरा की मात्रा और इसकी बढ़ती हुई गति

ई-कचरा दुनिया में सबसे तेज बढ़ने वाला कचरा का क्षेत्र है। 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 50 मिलियन टन ई-कचरा रिपोर्ट किया गया और इसलिए united nation ने इसे “tsunami of e-waste” का नाम दिया। ये आंकड़ा 2019 में बढ़कर 53.6 मिलियन टन हो गया।

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2017-18 में करीब 7,08,445 टन ई-कचरा उत्पन्न हुआ। 2019-20 में यही आंकड़ा बढ़कर 10,14,961 टन हो गया। भारत में इन ई-कचरों को इकट्ठा करना भी बड़ा मुश्किल काम है क्योंकि लोग इसके प्रति जागरूक नहीं हैं।

वर्ष 2017-18 में केवल 25,325 टन ई-कचरा ही इकट्ठा किया जा सका और 2018-19 में 78,281 टन ई-कचरा इकट्ठा किया जा सका। इस तरह से 2018 में सिर्फ 3% और 2019 में 10% कचरा ही इकट्ठा किया गया।

ये आँकड़े बताते हैं की ई-कचरा भारत और पूरी दुनिया में कितनी तेजी से बढ़ रहा है। इसे रोकना अत्यंत आवश्यक है नहीं तो इससे हमारे वातावरण और स्वास्थ्य के लिए ये बड़ी चुनौती बन सकता है। 


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ई-कचरा के उदाहरण और उनसे होने वाले नुकसान

ई-कचरा के अंतर्गत आने वाले तत्व और उनसे होने वाले नुकसान के बारे जानेंगे तब आपको इस बात का अंदाज होगा की ये हमारे स्वास्थ्य और वातावरण के लिए कितने खतरनाक हैं। इसलिए चलिए जानते हैं की ये कौन से तत्व हैं और इनसे क्या नुकसान होने वाला है-



Lead

हमारी लिस्ट का सबसे पहला जो ई-कचरा का तत्व है वो है lead, इसका इस्तेमाल solder, crt monitor glass और lead acid बैटरी में होता है। इसके संपर्क में आने से ये कई तरह की बीमारियां पैदा कर सकता है।

इसकी वजह से ज्यादातर दिमागी बीमारियां होती हैं। जैसे की ध्यान की कमी होना, hyperactive होना, conduct disorder, IQ कम होना, cognitive function का बिगड़ जाना और इसी तरह की अन्य आचरण संबंधी समस्या होना। ये ज्यादातर विकास की अवस्था में बच्चों को प्रभावित करता है।

E-Waste Kya Hai – Americium

ये तत्व smoke detector में इस्तेमाल किया जाता है। इसे धुआँ को पहचान करने के लिए लगाया जाता है। इसका इस्तेमाल cigarette और आग की धुआँ को पहचान कर अलार्म बजाने के लिए किया जाता है। ये तत्व carcinogenic होता है यानि की इससे कैंसर हो सकता है।

Cadmium

इसका इस्तेमाल light-sensitive resistor बनाने , समुद्री जहाजों में धातु पर जंग लगने से रोकने के लिए और nickel-cadmium बैटरी में इस्तेमाल होता है। यदि इसे सावधानी से recycle ना किया जाए तो ये मिट्टी में पहुँच सकता है और मिट्टी को दूषित कर सकता है और मिट्टी में रहने वाले सूक्ष्म जीवों को भी हानी पहुँचा सकता है।

यदि ये सांस के जरिए फेफड़े तक पहुँच जाए तो हमारे फेफड़े को काफी क्षति पहुँचा सकता है। इसकी वजह से गुर्दा को भी नुकसान पहुंचता है और मानसिक समस्याएं भी कर सकता है। इससे ध्यान की कमी, आचरण में गड़बड़ होना और neuromotor जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

Mercury

इसका इस्तेमाल fluorescent tubes, tilt switches और flat screen monitor के ccfl backlight में होता है। इसकी वजह से हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इससे मानसिक संतुलन बिगड़ना, dermatitis, याददाश्त में कमी और मांसपेशियों में कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं। इसके पर्यायवरण में पहुँचने से जानवरों की मृत्यु तक हो सकती है।

Polyvinyl chloride (PVC)

ये अधिकतर electronic devices में तारों के insulation के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसके निर्माण के समय जहरीले और खतरनाक तत्व जैसे की dioxins, release होता है।

और chlorine जैसे PVC, bioaccumulate होते हैं यानि की ये किसी भी जीव या मानव के अंदर जाने पर शरीर में इकट्ठा होते हैं। ये वातावरण में मिल जाने के बाद इंसानों और जानवरों तक पहुंचते हैं और इससे प्रजनन और विकासात्मक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।

वातावरण पर ई-कचरा का असर

ई-कचरा हमारे वातावरण के लिए अत्यधिक खतरनाक है। ये हमारे वातावरण में हवा, पानी और भूमि में मिलकर उसे प्रदूषित कर रहा है। इस प्रदूषण के जरिए ये इंसानों और जानवरों तक पहुँच सकता है और कई तरह की बीमारियों का शिकार बना सकता है। चलिए जानते हैं की ये कैसे हमारे वातावरण में प्रदूषण कर रहा है।

E-Waste Kya Hai – Air pollution

ई-कचरा के कुछ ऐसे तत्व हैं जो काफी अधिक मात्रा में dioxin बनाते हैं और ये हवा में मिलकर उसे दूषित करते हैं और हमारे स्वास्थ्य को क्षति पहुंचाते हैं। इसके अलावा ई-कचरा में प्लास्टिक की मात्रा भी होती है जिसे लोग जला देते है और इसकी वजह से ये कई तरह के खतरनाक गैस उत्पन्न करते हैं।

जल प्रदूषण- Water pollution

पानी में ई-कचरा बहुत सारे heavy-metal जैसे lead, cadmium, mercury से फैलता है। ऐसा देखा गया है कि ये पानी के जरिए कई सारे फसल में पहुँच जाते हैं और उसके जरिए इंसानों तक।

मृदा प्रदूषण-Soil pollution

E-Waste Kya Hai,चूंकि ई-कचरा कहीं भी फेंक दिया जाता है ऐसे में इसमें से निकले heavy metals मिट्टी के संपर्क में आ जाते हैं और उसे दूषित करते हैं। ये काफी खतरनाक है क्योंकि बहुत सारे लोग मिट्टी से जुड़े कार्य करते हैं और वो नंगे हाथों से मिट्टी को छूते हैं ऐसे में ई-कचरे के खतरनाक तत्व बड़ी आसानी से लोगों तक पहुँच सकता है और उनके स्वास्थ्य को हानी पहुँचा सकता है।

ई-कचरा को कम कैसे करें- how to reduce e waste in Hindi

ई-कचरा को कम करने के लिए हम सभी अपने-अपने स्तर से प्रयास कर सकते हैं और इसे और अधिक बढ़ने से रोक सकते हैं। इसके लिए हम नीचे दिए हुए कुछ तरीकों के बारे में जानेंगे जिसके जरिए इसे रोकने में काफी मदद मिलेगी-

E-Waste Kya Hai – Repair

जब आपका कोई electronic device खराब हो जाता है तो उसे फेंकने की बजाय repair कराकर इस्तेमाल करने से वो ई-कचरा में जाने से बच जाएगा। हम सभी को ये कोशिश करनी चाहिए की जब तक कोई device repair करके चलाई जा सकती है तब तक उसे इस्तेमाल मे लिया जाए।

E-Waste Kya Hai – ई-कचरा की Recycling

एक बार जब डिवाइस पूरी तरह से खराब हो जाए और repair करने से उसका काम ना चले तो उसे recycle करके ई-कचरा बनने से रोक जा सकता है। इसके लिए आपको अपना खराब device recycle centre पर खुद पहुँचाना चाहिए और एक जिम्मेदार व्यक्ति का कर्तव्य निभाना चाहिए।

ई-कचरा को recycle करने से ना सिर्फ ई-कचरा पर नियंत्रण पाया जा सकता है बल्कि इससे नए रोजगार के अवसर मिलेंगे और पुरानी वस्तु को फिर से इस्तेमाल में लाने से आर्थिक लाभ भी होगा।

Awareness

E-Waste Kya Hai,ऊपर दिए गए तरीके ई-कचरा को कम करने के लिए काफी बेहतर हैं लेकिन बिना awareness के लोगों को ये पता ही नहीं होगा की उन्हे ई-कचरा से क्या-क्या नुकसान होने वाले हैं।

इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी है की लोगों में ई-कचरा के प्रति जागरूकता फैलाई जाए और लोगों को इसके recycle और repair से होने वाले फ़ायदों के बारे बताया जाए और साथ ही ई-कचरा के नुकसान के बारे में भी बताया जाए।



Conclusion

तकनीक के साथ E-Waste Kya Hai भी पूरी दुनिया में काफी तेजी से बढ़ रहा है। जब कोई electronic device खराब हो जाता है और हम उसे फेंक देते हैं तो वो ई-कचरा कहलाता है। ये पूरी दुनिया में सबसे तेज बढ़ने वाला कचरा है। इससे स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है और कई तरह की मानसिक और शारीरिक बीमारियां होती हैं।

इसे रोकने के लिए हमें लोगों को जागरूक करना होगा और इसे recycle और repair के जरिए रोकना होगा नहीं तो आने वाले समय में ये वातावरण के लिए चुनौती बन सकता है।

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