Pawan Chakki क्या हे. Windmill Generate Energy.

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Pawan Chakki क्या हे.इलेक्ट्रिसिटी यानी बिजली मनुष्यों के मूल आवश्यकताओं में से एक चीज है.घर में उपयोग होने वाली छोटी – बड़ी कई ऐसी चीजें हैं जिन्हें चलाने के लिए हमें बिजली की आवश्यकता होती है.अगर एक दिन बिजली नहीं आती है तो काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.विश्व की जितनी आबादी है उन सभी को बिजली की आवश्यकता होती है.

ऐसे में उन सभी तक बिजली पहुंचाने के लिए बिजली का उत्पादन बड़े स्तर पर किया जाता है.आमतौर से बिजली उत्पादन के लिए परमाणु संयंत्रों, कोयला से चलने वाले बिजली घरों, पनबिजली घरों इत्यादि का उपयोग किया जाता है.

यह सभी बिजली उत्पादन के पारंपरिक तरीके हैं. इन तरीकों से बिजली उत्पादन के लिए लागत काफी अधिक आती है.तथा प्राकृतिक संसाधनों का भी नुकसान काफी अधिक होता है.

चूंकि बिजली उत्पादन के लिए अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करना पड़ता है.जिसकी उपलब्धता सीमित है.इसी कारण पिछले कुछ वर्षों से बिजली उत्पादन के वैकल्पिक तरीकों पर काफी बात की जाती रही है.

हवा की मदद से बिजली उत्पादन भी उन्हीं वैकल्पिक तरीकों में से एक तरीका है.हवा की मदद से बिजली उत्पादन का तरीका काफी पुराना है.लेकिन यह आमतौर से उपयोग में नहीं है.इस कारण काफी लोगों को नहीं पता होता है कि हवा से भी बिजली बनाई जा सकती है.

हवा से ही बिजली उत्पादन करने के लिए पवन चक्की यानी Windmill की मदद ली जाती है.आज आपको हम Pawan Chakki क्या हे इस आर्टिकल में इसी विषय में विस्तार से बताएंगे.

Pawan Chakki क्या है – What is Windmill in Hindi :

अगर आप भी जानना चाहते हैं कि Pawanchakki kya hai या Windmills kya hai तो इसका जवाब हम आपको इस आर्टिकल में दे रहे हैं.

Windmill Definition in Hindi :

Windmill एक ऐसी मशीन है जिसकी मदद से हवा के द्वारा बिजली पैदा की जाती है.यह मशीन पवन ऊर्जा (Wind Power) को घूर्णिय ऊर्जा (Rotational Energy) में फिर विद्युत ऊर्जा में बदलती है.

पवनचक्की कैसे ऊर्जा पैदा करता है –  How Windmill Generate Energy in Hindi :

Pawan Chakki क्या है. पवन चक्की हवा के माध्यम से बिजली हवा की गति का उपयोग करते हुए उत्पन्न करता है.पवन चक्की हवा से किस तरह बिजली पैदा करता है, यह पवन चक्की की बनावट को जानकर आसानी से समझ सकते हैं.

पवन चक्की के सबसे ऊपरी भाग पर एक बड़ा सा Box बना होता है.उस बॉक्स में ही बिजली उत्पादन के लिए ज़रूरी सभी आवश्यक Parts लगे होते हैं. इसमें सबसे आवश्यक ब्लेड, जेनरेटर, Gear Box इत्यादि लगे होते हैं.

जब हवा चलती है तो पवन चक्की के सबसे ऊपरी भाग पर लगे ब्लेड Rotor की मदद से घूमने लगते हैं.यह ब्लेड एक गेयर बॉक्स से जुड़े होते हैं.

गेयर बॉक्स का काम ये होता है कि वह ब्लेड के घूमने की स्पीड को बढ़ा देते हैं.जो गियरबॉक्स ब्लेड की स्पीड बढ़ाता है, वह दूसरे सिरे पर जेनरेटर से जुड़ा हुआ होता है.ब्लेड की स्पीड बढ़ने की वजह से गियरबॉक्स की मदद से जुड़ा हुआ जेनरेटर में लगा रोटेटर भी घूमने लगता है.इस तरह आसानी से बिजली पैदा होने लगता है.

विंडमिल्स कैसे काम करता है – How Windmill Works :

जो भी बातें ठीक ऊपर बताई गई है, वह पवनचक्की के काम करने का तरीका ही है.इसी को दूसरे तरीके से कहें तो, जब हवा चलती है तो वह Windmill में लगे हैं ब्लेड से टकराती है.ब्लेड से टकराती हवा उस वक्त तक गतिज ऊर्जा के रूप में होती है.

ब्लेड उस गतिज ऊर्जा को Mechanical Energy यानी यांत्रिक ऊर्जा में बदल देता है.यह यांत्रिक ऊर्जा Windmill में लगे जेनरेटर तक जाती है.जेनरेटर अंततः यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल देता है.

आमतौर से जब भी कहीं विंडमिल्स लगाया जाता है.तो कभी भी एक दो नहीं बल्कि अधिक संख्या में विंडमिल्स टॉवर लगाए जाते हैं.क्योंकि एक windmill से उतनी मात्रा में बिजली उत्पन्न नहीं की जा सकती,उसका उपयोग बड़े स्तर पर किया जा सके.

एक टॉवर से जितनी बिजली उत्पन्न होगी, उससे कुछ घरों की ही ज़रूरत पूरी हो जाएगी.इसलिए जब भी विंडमिल्स कहीं लगाया जाता है तो एक बड़े क्षेत्र पर यह लगाया जाता है.ताकि इससे इतनी ज्यादा बिजली उत्पन्न हो.जिससे कि एक पूरे शहर तक को बिजली की आपूर्ति की जा सके.

Optical Fibre क्या है.

Pawan Chakki क्या हे- पवनचक्की कैसा होता है – Windmill Structure in Hindi :

पवनचक्की कई छोटे-बड़े Parts से मिलकर बना होता है.पवनचक्की में उपयोग किए जाने वाले पार्ट्स (Components of Windmills) निम्नलिखित है –

    • पंखा (Blades) :   

Blades हमेशा पवन चक्की के सबसे ऊपरी भाग पर लगा हुआ होता है.हवा के चलने पर रोटर (Rotor) की मदद से ही पंखे घूमते हैं.जिससे कि बिजली उत्पादन के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू होती है.

Blades उसी Principal पर काम करता है, जिस पर किसी हेलिकॉप्टर में लगे पंखे काम करते हैं.विंडमिल्स में लगे पंखे एक साइड से हल्के मुड़े हुए यानी Curved जबकि एक साइड बिल्कुल Flat होता है.

    • गुब्बारे का डला (Nacelle) :

यह हिस्सा पवन चक्की के सबसे ऊपरी हिस्से पर होता है.यह एक बड़ा बॉक्स होता है.इसके अंदर गेयर बॉक्स (Gear Box) तथा जेनरेटर (Generator) लगे होते हैं.

इसके अलावा बीच में कई छोटे-बड़े कंपोनेंट्स होते हैं जो कि बिजली पैदा करने के लिए जरूरी होते हैं.

    • गियर बॉक्स (Gear Box) :

गेयर बॉक्स का काम ब्लेड की स्पीड को बढ़ाना होता है.जब हवा की मदद से ब्लेड घूमने लगते हैं तो उनकी स्पीड इतनी अधिक नहीं होती कि बिजली पैदा हो सके.

ऐसी स्थिति में गेयर बॉक्स पंखे की स्पीड को काफी बढ़ा देते हैं.आमतौर से पंखे की स्पीड 30 से 60 Rotation per minute (rpm) होता है.

लेकिन यहां लगा हाई स्पीड गेयर बॉक्स पंखे की स्पीड को बढ़ाकर 1000 से 1500 रोटेशन पर मिनट (rpm) कर देता है. 

किसी भी पवन चक्की में बिजली पैदा करने के लिए ब्लेड की स्पीड कम से कम इतनी होनी आवश्यक है.

    • शाफ़्ट (Shaft) :

शाफ्ट भी रोटेटर के साथ ही लगा हुआ होता है.जब हवा के दबाव के कारण पंखे घूमने लगते हैं तो रोटेटर में लगा हुआ सॉफ्ट भी घूमने लगता है.

Shaft का मुख्य काम यह होता है कि जब पंखों के घूमने से रोटेटर में मैकेनिकल एनर्जी तथा रोटेशनल एनर्जी पैदा होती है तो शाफ्ट ही.

इस एनर्जी को जेनरेटर में पहुंचाता है.यहीं से जेनरेटर Electrical Energy बनाता है.

    • जेनरेटर (Generator) :

जेनरेटर ही वह पार्ट्स होता है जो कि पंखे के घूमने पर बिजली पैदा करता है.विंडमिल्स में लगा जेनरेटर Electromagnetic Induction के सिद्धांत पर कार्य करते हुए बिजली पैदा करता है.

    • टॉवर (Tower) :

Windmill in Hindi.How Pawan Chakki Generate Energy.टॉवर किसी भी पवन चक्की का सबसे प्रमुख हिस्सा होता है.टावर को आसान भाषा में कहें तो यह एक ऊंचा मजबूत खंबा होता है.

जिसके ऊपर ही पवन बिजली उत्पादन के लिए जरूरी सभी आवश्यक पार्ट्स लगे होते हैं.टावर के ऊपर ही ब्लेड्स, जेनरेटर, गेयर बॉक्स इत्यादि लगे होते हैं.

इस टावर की ऊंचाई स्थान के आधार पर निर्धारित की जाती है.आमतौर से एक टावर की ऊंचाई 50 मीटर से लेकर 100 मीटर तक होती है.

हालांकि कहीं-कहीं इसकी ऊंचाई कुछ कम या इससे भी ज्यादा हो सकती है.टावर की ऊंचाई इस बात पर निर्भर करती है कि जहां पवनचक्की लगाया जाना है, वहां हवा कितनी स्पीड से चलती है.

हवा की स्पीड के आधार पर ही टावर की ऊंचाई का निर्धारण किया जाता है.टावर कई तरह के होते हैं.आज के दौर में आमतौर से मजबूत लोहे या स्टील से बने टॉवर का इस्तेमाल किया जाता है.

इसके अलावा भी कई अन्य मटेरियल का उपयोग टॉवर में होता है.

    • ब्रेक (The Brake) :

मशीन में लगे पंखे को कभी इमरजेंसी की स्थिति में या किसी अन्य कारण से रोकने के लिए प्रत्येक विंडमिल्स में एक ब्रेक भी दिया जाता है.

    • कंट्रोलर (The Controller) :

विंडमिल्स को कंट्रोल करने के लिए एक कंट्रोलर भी लगा होता है.जब 8 से 16 मील प्रति घंटे (mph) की स्पीड से हवा चलती है तो यह कंट्रोलर विंडमिल्स में लगे पंखे को घुमाने लगता है.

लेकिन जब कभी हवा की स्पीड 55 मील प्रति घंटे (mph) से अधिक हो जाती है.तो यह कंट्रोलर ब्लेड्स को तुरंत बंद कर देते हैं.

क्योंकि विंडमिल्स की इतनी क्षमता नहीं होती है कि वह 55 मील प्रति घंटे के अधिक के हवा को बर्दाश्त कर सके.अगर इतने अधिक हवा होने पर भी मशीन चलती रहे तो विंडमिल्स को काफी नुकसान होगा.

    • बैटरी (Battery) :

Windmill से निकलने वाले बिजली को स्टोर करने के लिए विंडमिल में एक बैटरी लगाया जाता है.जहां से फिर उसका उपयोग आवश्यकता अनुसार किया जाता है.

पवनचक्की के प्रकार – Types of Windmill in Hindi :

Windmills मुख्यतः 2 प्रकार के होते हैं –

  1. वर्टिकल एक्सिस विंडमिल्स (Vertical xis windmills).

2. हॉरिजोंटल एक्सिस विंडमिल्स (Horizontal Axis Windmills).

1. वर्टिकल एक्सिस विंडमिल्स (Vertical Axis Windmills) :

Pawan Chakki क्या हे – इस तरह के विंडमिल्स का उपयोग शुरुआती समय में किया गया था.वर्तमान समय में ऐसे विंडमिल्स का उपयोग बिलकुल ना के बराबर किया जाता है.इस तरह के विंडमिल्स में लगने वाले पंखे यानी ब्लेड जमीन के बिल्कुल सीधे (Perpendicular To The Ground) लगे होते हैं.

इस की अधिक उपयोग ना होने की वजह अधिक बिजली उत्पादन नहीं होता था.इस कारण इसका उपयोग छोटे स्तर तक ही सीमित रह गया.वर्टिकल एक्सिस विंडमिल्स को हॉरिजॉन्टल विंडमिल्स के नाम से भी जाना जाता है.

एक बात ध्यान दें कि हॉरिजॉन्टल एक्सिस विंडमिल्स अलग – अलग होते हैं.केवल “Axis” शब्द के उपयोग से ही नाम का मतलब बदल जाता है.

2.हॉरिजोंटल एक्सिस विंडमिल (Horizontal axis Windmills) :

वर्तमान समय में जिस विंडमिल्स का ज्यादा उपयोग किया जाता है वह हॉरिजोंटल एक्सिस विंड मिल ही होते हैं.इस तरह के विंडमिल्स की Importamce यह होती है कि हवा की दिशा के आधार पर आसानी से बिजली पैदा हो सके.

Horizontal axis Windmills को ही वर्टिकल विंडमिल्स (Vertical Windmills) कहा जाता है.

वर्टिकल विंडमिल्स के कई अलग-अलग प्रकार होते हैं जो कि निम्नलिखित है –

1. Post Mills (पोस्ट मिल्स).

2. Smock Mills (धुआं मिल्स).

3. Tower Mills (टॉवर मिल्स).

4. Fan Mills (फैन मिल्स).

1. Post Mills (पोस्ट मिल्स) :

इस तरह के विंडमिल्स का उपयोग 12वीं सेंचुरी से लेकर 19वीं सेंचुरी की शुरुआत में काफी किया गया था.समय के साथ इस तरह के विंडमिल्स उपयोग से बाहर हो गए.

इस तरह के विंडमिल्स में टॉवर के रूप में पेड़ के तने तथा लकड़ियों से बने खंभे उपयोग किए जाते थे.इसमें अक्सर छोटे तथा हल्के पंखों का ही उपयोग किया जाता था.

2. Smock Mills (धुआं मिल्स) :

Pawan Chakki क्या हे- Smoke Mills – इस तरह के विंडमिल्स की खासियत यह है कि इसका ऊपरी भाग Flexible होता है.जब की नीचे का बाकी बचा भाग Stable होता है.इसे इस तरह बनाया जाता है कि ऊपर के भाग को आप हवा के अनुसार जिधर चाहे घुमा सकते हैं.

इससे पूरे भाग को घुमाने की जरूरत नहीं पड़ती है.इस तरह के विंडमिल्स का उपयोग वहां किया जाता है जहां टावर की ऊंचाई काफी ज्यादा होती है.

स्मोक मिल के निर्माण में यानी टावर का निचला हिस्सा पत्थरों से बनाया जाता है.जबकि इसका ऊपरी हिस्सा लकड़ियों या अन्य हल्के सामग्रियों से बनाया जाता है.

इस तरह के मिल्स का निर्माण वैसी जगह पर किया जाता है जहां की जमीन दलदली हो या ज्यादा उबर-खाबर हो.इस तरह के विंडमिल्स हमेशा अन्य विंडमिल्स की अपेक्षा हल्के होते हैं.

3. Tower Mills (टावर मिल्स ) :

टावर मिल्स से कुछ हद तक स्मोक मिल्स की तरह होते हैं.लेकिन इसमें अंतर यह है कि इसके टॉवर पूरी तरह ईंट या पत्थरों से बनाया जाता है.इसका टावर हमेशा स्टेबल होता है.

जबकि सबसे ऊपरी भाग,जिसे कैप बोला जाता है वह Flexible होता है.चूंकि,टावर मिल्स में टावर का निर्माण ईंट तथा पत्थरों से होता है.इसलिए यह काफी मजबूत होते हैं। इसकी ऊंचाई निर्धारित नहीं है.

आवश्यकता अनुसार Tower Mills को ऊंचा किया जा सकता किया जाता है.चूंकि, टावर मिल्स का स्ट्रक्चर काफी मजबूत और ऊंचा होता है.इसलिए इतने बड़े-बड़े और मजबूत पंखों का उपयोग आसानी से किया जा सकता था.अधिक पंखे उपयोग करने का फायदा यह होता है कि अधिक मात्रा में बिजली पैदा सकते हैं.

4. Fan Mills (फैन मिल्स ) :

इस तरह के indmill का निर्माण छोटे स्तर पर किया जाता है.यह एक छोटा-मोटा विंडमिल होता है.इसका उपयोग कम मात्रा में बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है.यह अक्सर छोटे जगहों पर लगाया जाता है.इसकी ऊंचाई भी काफी कम होती है.

भारत में पवनचक्की से बिजली उत्पादन-Windmills in India :

आपने सुना होगा कि डेनमार्क को पवनों का देश (Pawano Ka Desh) कहा जाता है.

इसकी बड़ी वजह यह है कि डेनमार्क में काफी अधिक संख्या में पवन चक्की लगे हुए हैं.

डेनमार्क अपनी जरूरत का लगभग 19%  बिजली उत्पादन पवनचक्की के ही मदद से करता है.

चूंकि Wind Energy को ही बिजली उत्पादन का भविष्य माना जा रहा है.इस कारण दुनिया के अधिकतर देश अब हवा से बिजली उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.भारत भी इसमें पीछे नहीं.

फरवरी 2020 के आंकड़ों के अनुसार भारत में लगे सभी Windmills की कुल क्षमता 37.669 Gigawatt है. बता दें कि 1 Gigawatt = 1000 Megawatts होता है.

इतनी अधिक मात्रा में Wind Energy उत्पादन करने के कारण अधिक Wind Energy उत्पादन करने वाले देशों में भारत विश्व में फिलहाल चौथे नंबर पर है.

अनुमान है कि आने वाले वर्षों में Wind Energy उत्पादन करने वाले देशों में भारत पहले स्थान पर आ जाएगा. इसकी बड़ी वजह यह है कि भारत सरकार लगातार विंडमिल्स स्थापित करते जा रही है.

भारत में पवनचक्की का इतिहास  – Windmills History in India :

Pawan Chakki क्या हे-भारत में विंडमिल्स प्लांट लगाने की सुगबुगाहट 1952 में ही शुरू हो गई थी.इसके बाद लगातार प्रयास किए जाते रहे.लेकिन पहला Windmill ग्रिड स्थापित करने में भारत को 1986 तक का समय लग गया.

भारत का पहला Windmill Power Plant 40 किलोवाट का था.यह गुजरात के वेरावल नाम के स्थान पर लगा था.वर्तमान समय में भारत में काफी संख्या में Windmill Plants लगे हुए हैं.ये काफी अधिक मात्रा में बिजली का उत्पादन करते हैं.

आंकड़ों के अनुसार भारत में उत्पादित कुल Wind Energy का 29% अकेले तमिलनाडु में उत्पादन किया जाता है.इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना तथा केरला में भी बड़े स्तर पर windmill Plants लगे हुए हैं.

भारत यह लक्ष्य लेकर चल रही है कि आने वाले वर्षों में, भारत की बिजली निर्भरता जैसे कि सौर ऊर्जा तथा Wind Energy पर करना है.

Pawan Chakki क्या है-पवनचक्की के लाभ – Windmill Advantage in Hindi :

• पवन चक्की प्रकृति के लिए बिल्कुल अनुकूल है। इससे बिजली उत्पादन के लिए किसी तरह का प्रदूषण नहीं होता है.

• पवन चक्की से उत्पादन करने पर बिजली काफी सस्ता पड़ता है.जो खर्च आता है वह एक बार इसे लगाने में आता है.उसके बाद मेंटेनेंस पर अपेक्षाकृत कम  खर्च करने पड़ते हैं.

• पवन चक्की की खासियत यह है कि इससे अपनी आवश्यकता अनुसार कहीं भी लगाया जा सकता है.

• विंड एनर्जी Renewable तथा Sustainable है.

• विंड एनर्जी का उत्पादन बढ़ने से बिजली के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भरता कम हो रही है.

• विंडमिल्स की मदद से दूर दराज के इलाकों तथा दुर्गम जगहों पर भी बिजली पहुंचाना संभव है.

• Wind Energy का भविष्य उज्वल माना जा रहा है.

निष्कर्ष – Conclusion :

Pawan Chakki क्या हे आंकड़ों से पता चलता है कि विंड एनर्जी का उत्पादन काफी सुरक्षित है.यह सस्ता भी पड़ता है.जिस तरीके से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रहा है, उससे पारंपरिक तरीके से बिजली उत्पादन करने की बजाय Wind Energy पर ही जोड़ दिया जा रहा है.ऐसे में आने वाले समय में विंड एनर्जी का उत्पादन काफी बढ़ेगा.

चूंकि, पारंपरिक तरीके से बिजली उत्पादन के लिए अन्य प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है.जिसकी उपलब्धता सीमित है.जबकि,विंड एनर्जी के लिए केवल हवा की आवश्यकता पड़ती है.इसकी उपलब्धता असीमित है.ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि एनर्जी के क्षेत्र में विंड एनर्जी ही भविष्य है.



 

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इन आंकड़ों का संकलन खनन को निर्धारित करता है, और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा के लिए शत्रुतापूर्ण तत्वों द्वारा प्रोफाइलिंग करता है.

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एक गहन और तत्काल चिंता का विषय है.इनके आधार पर और हमारे नागरिकों की निजता पर। उन गंभीर चिंताओं को उठाएं.

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17. Super Clean – Master of Cleaner, Phone Booster.

18. WeChat reading.

19. Government WeChat.

20. Small Q brush.

21. Tencent Weiyun.

22. Pitu.

23. WeChat Work.

24. Cyber Hunter.

25. Cyber Hunter Lite.

26. Knives Out-No rules, just fight!.

27. Super Mecha Champions.

28. LifeAfter.

29. Dawn of Isles.

30. Ludo World-Ludo Superstar.

31. Chess Rush.

32. PUBG MOBILE Nordic Map: Livik.

33. PUBG MOBILE LITE.

34. Rise of Kingdoms: Lost Crusade.

35. Art of Conquest: Dark Horizon.

36. Dank Tanks.

37. Warpath.

38. Game of Sultans.

39. Gallery Vault – Hide Pictures And Videos.

40. Smart AppLock (App Protect).

41. Message Lock (SMS Lock)-Gallery Vault Developer Team.

42. Hide App-Hide Application Icon.

43. AppLock.

44. AppLock Lite.

45. Dual Space – Multiple Accounts & App Cloner.

46. ZAKZAK Pro – Live chat & video chat online.

47. ZAKZAK LIVE: live-streaming & video chat app.

48. Music – Mp3 Player.

49. Music Player – Audio Player & 10 Bands Equalizer.

50. HD Camera Selfie Beauty Camera.

Chinese Mobile Apps Bans.

51. Cleaner – Phone Booster.

52. Web Browser & Fast Explorer.

53. Video Player All Format for Android.

54. Photo Gallery HD & Editor.

55. Photo Gallery & Album.

56. Music Player – Bass Booster – Free Download.

57. HD Camera – Beauty Cam with Filters & Panorama.

58. HD Camera Pro & Selfie Camera.

59. Music Player – MP3 Player & 10 Bands Equalizer.

60. Gallery HD.

61. Web Browser – Fast, Privacy & Light Web Explorer.

62. Web Browser – Secure Explorer.

63. Music Player – Audio Player.

64. Video Player – All Format HD Video Player.

65. Lamour Love All Over The World.

66. Amour- video chat & call all over the world.

67. MV Master – Make Your Status Video & Community.

68. MV Master – Best Video Maker & Photo Video Editor.

69. APUS Message Center-Intelligent management.

70. LivU Meet new people & Video chat with strangers.

71. Carrom Friends: Carrom Board & Pool Game.

72. Ludo All-Star- Play Online Ludo Game & Board Games.

73. Bike Racing: Moto Traffic Rider Bike Racing Games.

74. Rangers Of Oblivion: Online Action MMO RPG Game.

75. Z Camera – Photo Editor, Beauty Selfie, Collage.

76. GO SMS Pro – Messenger, Free Themes, Emoji.

77. U-Dictionary: Oxford Dictionary Free Now Translate.

78. Ulike – Define your selfie in trendy style.

79. Tantan – Date For Real.

80. MICO Chat: New Friends Banaen aur Live Chat Karen.

81. Kitty Live – Live Streaming & Video Live Chat.

82. Malay Social Dating App to Date & Meet Singles.

83. Alipay.

84. AlipayHK.

Chinese Mobile Apps Bans.

85. Mobile Taobao.

86. Youku.

87. Road of Kings- Endless Glory.

88. Sina News.

89. Netease News.

90. Penguin FM.

91. Murderous Pursuits.

92. Tencent Watchlist (Tencent Technology).

93. Learn Chinese AI-Super Chinese.

94. HUYA LIVE – Game Live Stream.

95. Little Q Album.

96. Fighting Landlords – Free and happy Fighting Landlords.

97. Hi Meitu.

98. Mobile Legends: Pocket.

99. VPN for TikTok.

100. VPN for TikTok.

101. Penguin E-sports Live assistant.

102. Buy Cars-offer everything you need, special offers and low prices.

103. iPick.

104. Beauty Camera Plus – Sweet Camera & Face Selfie.

105. Parallel Space Lite – Dual App.

106. “Chief Almighty: First Thunder BC.

107. MARVEL Super War NetEase Games.

108. AFK Arena.

109. Creative Destruction NetEase Games.

110. Crusaders of Light NetEase Games..

111. Mafia City Yotta Games.

112. Onmyoji NetEase Games.

113. Ride Out Heroes NetEase Games.

114. Yimeng Jianghu-Chu Liuxiang has been fully upgraded.

115. Legend: Rising Empire NetEase Games.

116. Arena of Valor: 5v5 Arena Games.

117. Soul Hunters.

118. Rules of Survival.

Computer Engineer कैसे बनें

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Computer Engineer कैसे बनें.क्या आप कंप्यूटर में दिलचस्पी रखते हैं और आगे इसे कंप्युटर Profession की तरह लेना चाहते हैं? यदि हाँ तो आप इस लेख “कंप्यूटर इंजीनियरिंग कोर्स,जॉब और सैलरी” को पूरा पढ़ सकते हैं.

हमने इस लेख में कंप्यूटर इंजीनियरिंग कोर्स,कंप्यूटर इंजीनियर की सैलरी,कंप्यूटर इंजीनियर की जॉब और कंप्यूटर इंजीनियर कैसे बने इन सभी बिंदुओं का विस्तृत वर्णन किया है.

Computer Engineer कैसे बनें.के बारे में अधिक जानने से पहले एक बार कंप्यूटर के बारे में जानना जरूरी है.क्यूंकी Computer Science से संबंधित बहुत सारे कोर्स उपलब्ध हैं.जो नाम में एक दूसरे से मिलते जुलते हैं लेकिन असलियत में वो एक दूसरे से अलग हैं.

इसलिए कंप्यूटर इंजीनियरिंग को समझने के लिए कंप्यूटर के बारे मे जान लेते हैं.मुख्यतः कंप्यूटर के दो भाग कर सकते हैं-

1.हार्डवेयर(Hardware) : Hardware कंप्यूटर के वो हिस्से हैं जो हमें दिखाई देते हैं और जिन्हें हम छू सकते हैं.जैसे Mouse,Keyboard और वो सभी चीजें जिससे हमारा कंप्यूटर बना हुआ है और हमें दिखाई दे रहा है.

2.सॉफ्टवेयर(Software) : Software कंप्यूटर का Frame बन जाने के बाद उसमे कई सारे सॉफ्टवेयर यानी की Application और ऑपरेटिंग सिस्टम डाले जाते हैं जो हम स्क्रीन पर देखते हैं.जैसे की ऑपरेटिंग सिस्टम windows आजकल अधिक चलन में है।हम हमें छू नहीं सकते.  

Computer Engineer कैसे बनें.कंप्यूटर इंजीनियरिंग क्या है? 

वैसे तो आपको हेडिंग से पता चल रहा है की कंप्यूटर और इंजीनियरिंग के बारे में बात हो रही है।थोड़ी सी और गहराई में जाएं तो आपको समझ आएगा की कंप्यूटर विषय में इंजीनियरिंग की बात हो रही है.

लेकिन ये अन्य कंप्यूटर साइंस के कोर्स से अलग कैसे है?अभी ऊपर आपने पढ़ा की कंप्यूटर को दो भाग में बाँट सकते हैं हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर.

कंप्यूटर इंजीनियरिंग मे इन्हीं दोनों भागों की विशिष्ट पढ़ाई की जाती है.यानी की मुख्यतः कंप्यूटर बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है.लेकिन ऐसा नहीं होता की कंप्यूटर इंजीनियर अकेले ही कंप्यूटर बनाने में सक्षम होते हैं.

कंप्यूटर बनाने के लिए अन्य विभाग के ज्ञानी लोगों की जरूरत भी पड़ती है.जैसे की Electronic Engineer.परंतु कंप्यूटर इंजीनियर का काम मुख्यतः कंप्यूटर बनाना और उसे विकसित करना होता है.

कंप्यूटर इंजीनियरिंग कोर्स कौन से हैं और उनका टाइम Duration कितना है?

अब हम Computer Engineering कैसे बनें मे उपलब्ध कोर्स के बारे में जानेंगे जो की आप 12th पास होने के बाद कर सकते हैं.कंप्यूटर इंजीनियर बनने के लिए आपके पास नीचे दिए गए कंप्यूटर कोर्स उपलब्ध हैं.जिनमे से आप अपनी मर्जी से चुन सकते हैं.

इसके लिए आपको अपने संस्थान मे Department Of Computer Science And Engineering के विभाग मे दाखिला लेना होगा.

1.कंप्यूटर इंजीनियरिंग डिप्लोमा (Computer Engineering Diploma) :

ये तीन साल के कोर्स होते हैं जो की अधिकतर पालीटेक्निक कॉलेजों द्वारा कराया जाता है.लेकिन मैं आपको ये करने की सलाह नहीं दूंगा.

क्यूंकी Diploma करने भर से आप एक अच्छे कंप्यूटर इंजीनियर नहीं बन पाएंगे और आपको मनपसंद नौकरी नहीं मिल पाएगी.

2.स्नातक या undergraduate course :

इसमे आप स्नातक स्तर का कोर्स B.Tech यानी Bachelor Of Technology कर सकते हैं.

जो की चार साल के Duration का होता है.इसमें आपको कंप्यूटर इंजीनियरिंग का ब्रांच चुनना होगा.यदि आपको एक अच्छा कंप्यूटर इंजीनियर बनना है तो 12th  के बाद ये कोर्स आपके लिए अच्छा रहेगा.

3.Post graduate(pg) :

यदि आपने Computer में Graduation किया हुआ है तो आप पोस्ट Graduate यानी की मास्टर डिग्री ले सकते हैं.

इसके लिए आपको अपने ब्रांच मे M.Tech करना होगा.M.Tech का मतलब होता है Master Of Technology,और ये दो साल का कोर्स होता है.

यदि आपने मास्टर डिग्री भी ले रखी है तो आप Phd(Doctor Of Philosophy) का कोर्स भी कर सकते हैं.

इसके बाद आप रिसर्च के क्षेत्र में काम कर सकते हैं और अपना करिअर बना सकते हैं.

कंप्यूटर इंजीनियर कैसे बनें?(How To Become a Computer Engineer)?

कंप्यूटर इंजीनियर बनने के लिए आपको 12th के बाद इंजीनियरिंग के प्रवेश परीक्षा में भाग लेना होगा और उसमे अच्छे अंकों के साथ मेरिट में आना होगा।तब आपको बढ़िया कॉलेज में admission मिलेगा.

Pulse Oximeter क्या है.

Computer Engineer कैसे बनें – प्रवेश परीक्षा और उसकी Eligibility :

प्रवेश परीक्षा (Entrance Examinations).

Computer Engineering.के लिए कई प्रवेश परीक्षाएं होती हैं।कुछ राष्ट्रीय स्तर पर तो कुछ राज्य स्तर पर. इसमे सबसे मशहूर Jee-Mains और Advance हैं।चलिए कुछ प्रवेश परीक्षाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं.

1.Jee-Mains :

यह भारत मे राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा है.

इसमें सफल होने पर आपको Nit(National Institute Of Technology) में दाखिला यानि Admission मिल जाता है साथ ही Jee Advance की परीक्षा के लिए भी योग्य होते हैं.

2.Jee-Advance :

जो लोग Jee Mains से सिलेक्ट हो जाते हैं वो लोग इस प्रवेश परीक्षा में भाग ले सकते हैं.इसमे चुने जाने के बाद आपका Admission भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT मे हो जाता है.

3.Upsee :

यह उत्तर प्रदेश मे राज्य स्तर पर कराई जाने वाली इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा है.

इसमे चुने जाने पर आप AKTU और राज्य के अन्य उच्च संस्थान में दाखिला प्राप्त कर सकते हैं.

इसी तरह से सभी राज्य अपने-अपने स्तर से इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाएं कराती हैं, आप अपने राज्य मे पता कर सकते हैं.

4.Lpu-Nest :

यह Lovely Professional University द्वारा कराई जाने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है.

इसका पूरा नाम National Entrance And Scholarship test है। आप इसमें चुने जाने पर Lpu मे Admission ले सकते हैं.

ये सिर्फ कुछ प्रवेश परीक्षाएं हैं इसी तरह से यूनिवर्सिटी अपने स्तर और राज्य अपने स्तर पर प्रवेश परिक्षयएं कराते हैं.उनके बारे में सटीक और विस्तृत जानकारी के लिए आप उन Universities की वेबसाईट पर जाकर पता कर सकते हैं.

Eligibility :

Engineering की प्रवेश परीक्षा मे भाग लेने के लिए निम्न अर्हताएं होनी चाहिए-

1. 12th  मे कम से कम 75% अंक के साथ पास हुआ हो.ये Jee-Mains का Eligibility Criteria है.अलग-अलग शिक्षण संस्थान अपना-अपना नियम और अर्हताएं तय करते हैं।इसलिए आपको जिस शिक्षण संस्थान में जाना हो वहाँ के नियम पता करें.

2. आपने 12 वीं में गणित,रसायन विज्ञान तथा भौतिक विज्ञान मुख्य विषय के रूप में लिया हो तथा पास किया हो.

3. जिन विद्यार्थियों का 12 वीं का रिजल्ट नहीं आया है लेकिन उन्होंने परीक्षा दे दि है तो वो भी कंप्यूटर इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में बैठ सकते हैं.

बेहतरीन कॉलेज या संस्थान :

Computer Engineering.How To Become a Computer Engineer – वैसे तो भारत में बहुत सारे कॉलेज हैं जो कंप्यूटर इंजीनियरिंग का कोर्स कराते हैं.लेकिन हम आपको कुछ गिने चुने कॉलेज या संस्थान का नाम नीचे दे रहे हैं जो की काफी अच्छे हैं.अब इसका मतलब ये नहीं की जिनका नाम इसमे नहीं है वो अच्छे नहीं हैं वो भी अच्छे हो सकते हैं आप कहीं भी Admission लेने से पहले उसका रिव्यू जरूर देखें.

    1. लगभग सभी IIT जहां पर ये कोर्स कराया जाता है.
    2. BITS हैदराबाद.
    3. Delhi Technological University.
    4. लगभग सभी NIT.
    5. IIIT(International Institute Of Technology).
    6. सभी राज्य स्तर के संस्थान.

कंप्यूटर इंजीनियरिंग का स्कोप

कंप्यूटर इंजीनियरिंग करने के बाद कुछ लोग नौकरी करने में लग जाते हैं और कुछ लोग आगे की पढ़ाई जारी रखते हैं.आगे हम दोनों ही पहलू पर चर्चा करेंगे.

कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद आप सॉफ्टवेयर और it कंपनी,टेलीकम्यूनिकैशन,कंप्यूटर नेटवर्किंग,सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट,ऑटमोटिव इंडस्ट्री,एरोस्पैस, कॉलेज तथा स्कूल्स में नौकरी पा सकते हैं.

कंप्युटर में जॉब्स देने वाली शीर्ष संस्थाएं

    1. TCS(Tata Consultancy Services).
    2. CTS.
    3. Wipro.
    4. Apple.
    5. Microsoft.
    6. Amazon.
    7. Toshiba.
    8. HP.
    9. Lenovo.
    10. LG.
    11. Samsung.

कंप्यूटर इंजीनियरिंग के बाद पढ़ाई 

यदि आपने कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी ली है और आप अभी नौकरी ना करके आगे पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं तो आप M.Tech कर सकते हैं। M.Tech का फूल फॉर्म होता है Master Of Technology.

आपको अच्छे संस्थान से M.Tech करने के लिए GATE की परीक्षा देनी पड़ती है।इसमे पास होने पर आप देश के शीर्ष संस्थानों या महाविध्यालयों में दाखिला ले सकते हैं.

यदि इसके आगे भी आपको पढ़ने का मन है तो आप phd कर सकते हैं।पीएचडी करने के बाद आपको रिसर्च में काम करने का मौका मिलेगा।

जॉब्स और जॉब प्रोफाइल

    1. सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर : इस पद पर आपका काम मुख्यतः नए सॉफ्टवेयर बनाना और यूजर अनुभव को बेहतर बनाने का होता है.
    2. टेक्निकल सोलूसन इंजीनियर: इसमे आपको कंप्यूटर के हार्डवेयर और  सॉफ्टवेयर में आने वाली तकनीकी गड़बड़ी या खराबी को देखने का काम होता है.
    3. कंप्यूटर हार्डवेयर और नेटवर्किंग इंजीनियर: इस पद पर आपको कंप्यूटर के नेटवर्क संबंधी कामों की देखरेख और निगरानी करनी होती है.
    4. इन्स्टालेशन इंजीनियर: इसमे आपको मुख्यतः कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर,हार्डवेयर और नेटवर्क को ठीक तरह से लगाने का काम होता है.
    5. सिस्टम इंजीनियर: सिस्टम इंजीनियर का काम सॉफ्टवेयर सर्किट और कंप्यूटर के अन्य भाग को विकसित करना,उसकी टेस्टिंग करना होता है.

इनके अलावा अन्य तरह के पद पर कार्य होते हैं जो की सभी लगभग कंप्यूटर को बनाने से लेकर उसे विकसित करने के अंतर्गत ही होता है.

Computer Engineer कैसे बनें – सैलरी(Salary)

कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग के बाद आपको अच्छी खासी सैलरी मिलती है.

लेकिन ये सभी के कॉलेज के आधार पर होता है.आप जीतने अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज से हैं आपको उतना ही अधिक सैलरी मिलती है.फिर भी एक लगभग का आंकड़ा नीचे दिया गया है.

    1. Fresher : लगभग 2 लाख सलाना.
    2. 3 से 5 वर्ष के अनुभव के बाद: लगभग 4 से 6 लाख सलाना.
    3. 5 वर्ष से अधिक अनुभव: लगभग 8 लाख से ऊपर.

कंप्यूटर साइंस और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में अंतर.Computer Science And Computer Engineering In Hindi :

यदि आप किसी से पूछेंगे की कंप्यूटर साइंस क्या है?और ये कंप्यूटर इंजीनियरिंग से अलग कैसे है तो अधिकतर लोग कहेंगे की दोनों एक ही हैं लेकिन चलिए हम अंतर बताते हैं.कंप्यूटर साइंस और कंप्यूटर इंजीनियरिंग देखने में एक जैसे लगते हैं लेकिन इन दोनों में काफी फरक होता है.कंप्यूटर इंजीनियर का काम ज्यादातर कंप्यूटर के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंटरफेस बनाने का होता है।यानि की शुरुआती काम कंप्यूटर इंजीनियर का होता है.

वहीं कंप्यूटर साइंस में सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी खोजना,कई तरह की प्रोग्रामिंग भाषा जानना,ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में गहरी जानकारी रखना तथा डेटाबेस को Maintain रखने का काम होता है. 

निष्कर्ष और सुझाव (Conclusions And Suggestions) :

आशा है की आपने Computer Engineer कैसे बनें के बारे में पूरा लेख पढ़ लिया होगा और इस बात की पूरी जानकारी होगी की कंप्यूटर इंजीनियरिंग क्या है और कंप्यूटर इंजीनियर बनने के लिए क्या-क्या करना होगा.

लेकिन फिर भी उन सभी बातों को समेटते हुए एक बार फिर पूरी प्रक्रिया बता देते हैं.जब आप कक्षा 11 वीं में पहुंचते हैं तभी से आपको अपने करिअर की दिशा का चुनाव कर लेना चाहिए.हालांकि ये चुनाव करने में आपको कुछ महीनों का वक्त लगाना चाहिए.

उसके बाद जैसे ही आपको ये पता लगे की भविष्य में आप क्या करना चाहते है उसके अनुसार अपनी तैयारी शुरू करें क्यूंकी आज के समय में अच्छे संस्थान में दाखिला पाने के लिए पहले से तैयारी करनी पड़ती है. 

Metal Detector क्या हे.कहा कहा Use होता हे.Price And Importance.

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Metal Detector क्या हे. कहा कहा Use होता हे.Metal Detector एकमात्र ऐसा उपकरण है जिसके उपयोग से धातु के आसपास होने का संकेत आसानी से मिल जाता है.

इस उपकरण के उपयोग का अधिकार सिर्फ पुलिस कर्मचारी एवं कुछ निजी कम्पनी के व्यक्तियों को ही है.सवाल यहाँ यह उठता है की,ऐसी कौन सी चीज़ या सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है जिसके कारण यह धातु संकेत ढूंढने में इतना कुशल है,क्या यह हर बार धातु ढूंढने के प्रयास में सफल होता है? क्या हमें इसपर आँख बंद करके विश्वास करना चाहिए?

इस प्रश्न का जवाब भी काफी सरल है.मेटल डिटेक्टर को प्रभावी बनाने हेतु,उसमें चुम्बक का इस्तेमाल किया जाता है.चुम्बकीय आकर्षण के कारण धातु मेटल डिटेक्टर की ओर खींचा चला आता है.

जिसकी वजह में अधिकारीयों को व्यक्ति के पास धातु की समान होने की भनक लग जाती है.ए हर बार धातु के पदार्थों को खोज निकालने में सफल होता है.

क्योंकि यह एक कथित वैज्ञानिक सिद्धांत पर चलता है जिसे प्रयोगशाला में अनको बार सिध्द किया गया है.प्रयोग के बाद यह निष्कर्ष निकला की इसको आँख बंद करके भी विश्वास किया जा सकता है.

मेटल डिटेक्टर सिद्धांत-  चुम्बकीय आकर्षण विस्तार से समझें।(Metal detector theory in Hindi – understand the magnetic attraction in detail) :

Metal Detector क्या हे.मेटल डिटेक्टर जिसे धातु संसूचक के नाम से भी जाना जाता है.विद्युत चुम्बकीय आकर्षण के सिध्दान्त पर चलता है.

इसके अनुसार मेटल डिटेक्टर के तार की कुंडलियों में ऐसी धारा का प्रवाह होता है,जिसकी दिशा विद्युत परिपथ के संपर्क में आते ही बदल जाती है.इस प्रक्रिया में एक विद्युत दोलन का इस्तेमाल भी किया जाता है जो उर्जा संचालन में मेटल डिटेक्टर का सहयोग करता है.

यह धारा के साथ मिलकर मेटल डिटेक्टर में चुम्बकीय आकर्षण तेजी से पैदा करता है और धातु संकेत को चुम्बकीय शक्ति से खोज निकालने में अधिकारीयों की मदद करता है.

मेटल डिटेक्टर के भी अनेक प्रकार होते है.यह मेटल डिटेक्टर,काम और कौन इसका प्रयोग करेगा जैसी चीज़ों को ध्यान में रखकर बनाया जाता हैं.

मेटल डिटेक्टर इच्छा अनुसार दो आकारों में आता है,यह काम की गंभीरता पर निर्भर करता है.जिसके कारण ग्राहकों को अपना मनपसंद मेटल डिटेक्टर चुनने में आसानी होती है.

डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर 

डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर शीघ्र व सरलता पूर्वक किसी की तलाशी लेने के लिए बना है.किसी भी प्रतिष्ठित सिनेमा घर या एयरपोर्ट में अधिकारियों के पास यह सुरक्षा का साधन जरूर होता है.

क्योंकि यह मिनटों में धातु संकेत पकड़ने के काबिल है.यह एक छोटे उपयोगी यंत्र के समान होता है जिसे बिना कठिनाई के दिन भर पकड़ा जा सकता है.इसे सेना के खतरनाक कामों मै इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर

हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर सेना के विभिन्न मिशनों में उनकी सहायता करने के लिए बना है.यह सैनिकों को बिना संकट में दालें –लैंड माइंस,बम,विस्फोटक,आदि ढूँढ निकालता है.इसे ज्यादातर सैनिक या पुलिस अधिकारी इस्तेमाल करते हैं.

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Animation and VFX क्या हे

मेटल डिटेक्टर- कीमत भारत में (Metal Detector – Price in India) :

शुरुआती कीमत 1,000 से 7,000 के बीच में हो सकती है जो मेटल डिरेक्टर और उसके काम पर निर्भर करती है.डोर फ्रैम मेटल डिटेक्टर की कीमत हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर से काफी हद तक कम होती है.क्योंकि इसका प्रयोग सरल क्रियाओं के लिए होता है.

जबकि हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर किसी जगह की पूर्ण सुरक्षा को ध्यान में रखकर खरीदा जाता है जिसके कारण उसका दाम भी बढ़ जाता है.अगर आपका मनपसंद मेटल डिटेक्टर अग्रिम प्रोद्योगिकी की श्रेणी में आता है तो बाकायदा उसकी कीमत विनिर्माण लागत के आसपास होगी.

Metal Detector क्या हे.अर्थशास्त्र की निती को ध्यान में रखते हुए,ऐसे मेटल डिटेक्टर का थोक भाव में मिलना केवल मुश्किल ही नही तकरीबन नामुमकिन है क्योंकि ये विशेष प्रवृत्ति के होते है.मेटल डिटेक्टर आयत के तौर पर भी मंगाया जा सकता है.

यह मूल्यवान व अत्यधिक दक्षता के साथ बनाए जाते हैं.इसकी एक खासियत यह है की यह पुरातत्व अनुसंधान में बिना किसी त्रुटि के 100% सटीक परिणाम देता है.

पुरातत्व वेत्ता ज्यादातर आयत से मिली मेटल डिटेक्टर का इस्तेमाल करते है चुकी इसकी सटीकता विश्व प्रसिद्ध व मान्य है.

Metal Detector

मेटल डिटेक्टर मशीन के कुछ विशेषताओं पर चर्चा करते हैं (Metal detectors discuss some features of the machine in hindi) :

उन्नीसवीं शताब्दी में मेटल डिटेक्टर की क्षमता सीमित थी.व वह जरूरत से ज्यादा ऊर्जा का इस्तेमाल करते थे.आज के जमाने में मेटल डिटेक्टर धातु का खोज उसके रेडियो आवृत्ति से भी किया जा सकता है.

इतना ही नही, मेटल डिटेक्टर की दक्षता के कारण,उसका अब बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है.यह हर छोटे से छोटे या बड़े से बड़े शहर में मौजूद है और सभी बड़े व्यापारियों की पहली पसंद भी है.

मेटल डिटेक्टर कहाँ खरीदा जा सकता है (Where can I buy a metal detector) ?

मेटल डिटेक्टर, थोक भाव में, किसी भी करीबी अग्रिम प्रोद्योगिकी के माल रखने वाले दुकानदार के पास उपलब्ध होगा.या फिर अगर आप घर बैठे इस उपकरण को खरीदना चाहते है तो ऑनलाइन भी लेन-देन का लाभ उठा सकते है.

मेटल डिटेक्टर का इतिहास(History of Metal Detector in Hindi) :

Metal Detector क्या हे.सालों की मेहनत के बाद सन् 1937 में मेटल डिटेक्टर की खोज जेरहार्ड फिशर द्वारा की गई थी.जिन्हें आज विश्व भर में प्रसिद्ध उन के इस निर्माण के कारण मिली है.

विश्व युद्ध 1 के दौरान अनगिनत सैनिकों की भयंकर मौतों को देखकर, सरकार कांप उठीं थी,और बम व विस्फोटक को बिना दुश्मनों को आगाह किए ढूंढ निकालने का उपाय ढूंढ रही थी.

विश्व युद्ध 2 के चरण पर सरकार वैज्ञानिकों पर दवाब बनाने लगी और उपाय की मांग करने लगी.सैनिकों की दुर्दशा और सरकार की लाचारी को देखते हुए जेरहार्ड फिशर ने मेटल डिटेक्टर का निर्माण किया जिसे पेटेंट करने के बाद विश्व भर में बेचा गया.

फिलहाल विश्व स्तर पर उत्पादन और बिक्री न सिर्फ सरकार के कार्य के लिए हो रहा है.बल्कि निजी व्यवसाय के लिए भी हो रहा है.

किसी भी महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था में निजी व्यवसाय व सरकार का समानांतर योगदान होने के कारण, दोनों को सुरक्षा के मामले में बराबरी का हक दिया गया है.

हालांकि सरकार के पास अन्य विकल्प भी है क्योंकि सरकार सबसे शक्तिशाली व प्राथमिक संगठन है.संघर्ष युद्ध के दौरान सैनिकों ने मेटल डिटेक्टर को सतर्कता बनाए रखने और बिना उत्पात मचाए जंग जितने में इस्तेमाल किया था.जंग के अलावा मेटल डिटेक्टर,

    • चिकित्सा क्षेत्र में,
    • पुरातत्व में,
    • भवन निर्माण में भी इस्तेमाल किया जाता है.

इसका एक कारण यह भी है की मेटल डिटेक्टर हमेशा सटीक परिणाम देता है और किसी अनहोनी से व्यक्ति को बचने में सहायता करता है.

किस प्रकार के धातुओं को खोज निकालने में मेटल डिटेक्टर सक्षम है (What type of metal detector is capable of detecting metals) ?

लोहा– मेटल डिटेक्टर का चुम्बकीय आकर्षण लोहे से निकलते संकेत को बिना कठिनाई पकड़ लेता है.लोहे की खासियत यह है की यह कम प्रभावशाली मेटल डिटेक्टर में भी आसानी से पकड़ा जाता है.जिसके कारण लोहे से बनें गन, बम, आदि मेटल डिटेक्टर की चपेट में आ जाते है.

निकल– निकल लोहे समान बिना कठिनाई पकड़ में आ जाता है.कयोंकि वह लोहे से काफी हद तक मिलता-जुलता है और उसकी अनेक विशेषताएँ लोहे के जैसी है.

अन्य धातु (Other metals) :

    • कोबाल्ट (Cobalt).
    • तांबा (Copper).
    • पीतल (Brass).
    • एल्यूमीनियम (Aluminium).
मेटल डिटेक्टर और धातु का विद्युत चालन से संबंध (Metal detector and metal to electrical conduction) :

धातु जैसे –

    • लोहा,
    • एल्यूमीनियम,
    • निकल, आदि विद्युत सुचालन में मददगार होते है.

जिसके कारण चुम्बकीय आकर्षण धातु के संपर्क में आते ही बढ़ जाता है.धातु के अलावा पानी भी विद्युत चालक है परंतु मेटल डिटेक्टर उसके संपर्क में आने के बावजूद नहीं बजता.क्योंकि पानी विद्युत से बनने वाले चुम्बक की ओर आकर्षित नहीं होता है.

विद्युत चुम्बकीय आकर्षण के इस वैज्ञानिक सिद्धांत की वजह से मेटल डिटेक्टर सिर्फ धातु पदार्थों को खोज निकालने में सफल हो पाता है.

मेटल डिटेक्टर- क्या हमें इसकी जरूरत है (Metal detector – do we need it) ?

मेटल डिटेक्टर खरीदने के दो मुख्य कारण है जो हमने काफी विचार कर लिखा है:

1. सुरक्षा- प्राथमिक कर्तव्य(Safety – Primary Duty) :

व्यक्ति की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता होती है.और अपने समाज को सुरक्षित रखना उसका धर्म है.इस कर्तव्य को ध्यान में रखते हुए हम आपको एक मेटल डिटेक्टर लेने की सलाह देते है.

खास तौर पर अगर आप किसी व्यस्त स्थान में कारोबार करते है.इससे आप सिर्फ अपनी ही नहीं बल्कि अपने ग्राहकों की, राहगीरों की व अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा संरक्षित करते है.धर्म पालन करने से व अपने कर्तव्य को पूरा करने से आप जन सेवा के भागीदारी बनते है.

2. देश सेवा व सैन्य सुरक्षा(Country Service and Military Security) :

सीमा पर हमारे जवानों की सुरक्षा के लिए मेटल डिटेक्टर ऐसा एकमात्र साधन है.जो जमीन की परत के नीचे से भी बम जैसे घाटक विस्फोटक सूंघ निकालता है.

अवैध आतंकी गतिविधियों को पहचानने और रोकने में सफल होता है.यह सरकारी कार्यक्रम में, कार्यालयों में, एयरपोर्ट व अन्य महत्वपूर्ण स्थलों में किसी भी अगोचर बाधा को तालने में मदद करता है और सफल भी होता है.

Conclusion:

इ तो आप सब जान गया हे के मेटल डिटेक्टर की इम्पोर्टेंस.आज हम सब इ भी जान चुके हे की मेटल डिटेक्टर आज की डिजिटल लाइफ में कितना महत्पूर्ण and जरुरी हे.  

SSL Certificate क्या है,डिटेल्स जानकारी Hindi में.

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SSL Certificate क्या है,डिटेल्स जानकारी Hindi में जितनी तेजी से इंटरनेट का उपयोग बढ़ा है, उतनी ही तेजी से इंटरनेट पर होने वाले धोखाधड़ी में भी इजाफा देखने को मिला है.इसी को कम करने के लिए इंटरनेट सुरक्षा के क्षेत्र में काफी काम किए गए हैं.इसके अलावा आज भी इंटरनेट को लोगों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए काम किए जाते रहे हैं.

इंटरनेट पर लोगों की सुरक्षा के लिए ही SSL Certificate का उपयोग किया जाता है.आप लोगों ने एसएसएल सर्टिफिकेट के बारे में जरूर सुना होगा.खासकर अगर आप ब्लॉगिंग के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं तो आपने SSL Certificate के बारे में सुना ही होगा.पहली बार एसएसएल सर्टिफिकेट के बारे में सुनने पर लोग नहीं समझ पाते हैं कि यह क्या है.

आज आपको इस आर्टिकल में हम SSL Certificate के बारे में ही पूरी जानकारी देंगे. इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि एसएसएल सर्टिफिकेट क्या है. एसएसएल सर्टिफिकेट का फुल फॉर्म क्या होता है, एसएसएल सर्टिफिकेट का उपयोग कहां किया जाता है (SSL certificate Use in Hindi),एसएसएल क्यों जरूरी है, एसएसएल के फायदे क्या है. हम आपको एसएसएल सर्टिफिकेट के प्रकार के बारे में भी बताएंगे.इसके अलावा इस आर्टिकल में आपको एसएसएल सर्टिफिकेट से जुड़ी कई और जानकारी मिलेगी.इसलिए SSL Certificate के बारे में पूरी जानकारी के लिए इसे लास्ट तक पढ़ें.

फुल फॉर्म क्या है 

SSL का फुल फॉर्म क्या होता है.तो आपको बता दें कि SSL ka FullForm Secure Sockets Layer होता है.

SSL certificates in hindi

जब भी पहली बार कोई SSL Certificate के बारे में सुनता है,तो उसके दिमाग में एक सवाल ज़रूर आता है कि SSL Certificate kya hai.तो चलिए जानते हैं कि SSL Certificate क्या होता है.SSL certificate एक सुरक्षा कवच होता है.जो कि एक वेबसाइट के सर्वर तथा वेबसाइट ब्राउज़र के बीच सुरक्षा कवच की तरह काम करता है.SSL Certificate Web Browser तथा Web Server के बीच Encrypted Communication स्थापित करता है.

यह एक ऐसी सुरक्षा व्यवस्था है जिसका उपयोग विश्व भर में करोड़ों वेबसाइट द्वारा किया जाता है.इसे विश्व के सभी देशों द्वारा मान्यता मिली हुई है.यानी कि एसएसएल सर्टिफिकेट एक Globally Accepted Security Certificate है.SSL certificate ब्राउज़र तथा सर्वर के बीच इंक्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्रस्थापित करने के अलावा,एक वेबसाइट को भी प्रमाणित (Verify) करता है.

जिस वेबसाइट पर SSL Certificate होता है,उससे पता चलता है कि यह वेबसाइट उपयोग के लिए पूरी तरह सुरक्षित है.तथा एसएसएल सर्टिफिकेट वाले वेबसाइट से किसी तरह के Data की चोरी संभव नहीं है.SSL Certificate को एक अन्य नाम Digital Certificate के नाम से भी जाना जाता है.इसे एक अन्य नाम Transport Layer Security (TLS) के नाम से भी जाना जाता है.

एसएसएल सर्टिफिकेट के बारे में और सरल तरीके से आप इस आर्टिकल में आगे पढ़ कर समझ जाएंगे.एसएसएल सर्टिफिकेट का उपयोग सभी तरह के वेबसाइट की सुरक्षा देती हे.इंटरनेट से जुड़े अन्य प्रोडक्ट्स की सुरक्षा जैसे ईमेल, Apps etc.के लिए भी किया जाता है.किसी वेबसाइट पर SSL Certificate लगा हुआ है या नहीं, वह आप बड़ी आसानी से पता लगा सकते हैं.

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कैसे जाने की किसी वेबसाइट पर सर्टिफिकेट है या नहीं?

जब आप किसी ऐसे वेबसाइट पर जाएंगे जहां SSL Certificate का उपयोग नहीं किया गया है,तो आपको डोमेन नेम यानी वेबसाइट से ठीक पहले केवल http:// ही दिखायी देगा. लेकिन जब आप एक ऐसे वेबसाइट पर जाएंगे जहां SSL Certificate का उपयोग किया गया है वहां आपको डोमेन नेम से पहले https:// दिखाई देगा.

यानी केवल S जुड़ जाने से ही आप समझ सकते हैं कि उस वेबसाइट में SSL Certificate का उपयोग किया गया है.इसके अलावा जिस वेबसाइट में एसएसएल सर्टिफिकेट का उपयोग किया जाता है, उस वेबसाइट में Https से पहले एक ताले (Lock) का Symbol आ जाता है.Https वेबसाइट उपयोग के लिए पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं.यहां अगर आप कोई अपना निजी डेटा देते हैं तो उसके चोरी होने का खतरा नहीं होता है.

SSL Certificate कैसे काम करता है – How SSL certificates work in hindi.

एसएसएल सर्टिफिकेट कैसे काम करता है, इसे हम आपको बेहद सरल तरीके से बताते हैं.SSL certificate मुख्य रूप से Data को इंक्रिप्ट कर देता है.

अब इसे आप इस तरह समझे कि जब आप कोई जानकारी,उदाहरण के तौर पर अपना नाम या मोबाइल नंबर किसी SSL Enabled Website पर डालते हैं, तो यह जानकारी सर्वर तक सीधे नहीं पहुंचती बल्कि आपके नाम या नंबर को SSL Technology कोड वर्ड में बदल देता है.ये कोड वर्ड बेहद जटिल होते हैं.जिसे पढ़ना किसी भी इंसान के बस की बात नहीं होती.ये केवल वेब सर्वर तथा ब्राउज़र के बीच ही रहता है.इसे केवल सर्वर ही पढ़ पाता है.ब्राउज़र तथा वेब सर्वर के बीच ये इनक्रिप्शन Public key  तथा Private Key के द्वारा ही पूरा होता है.ये दोनो एक साथ काम करते हुए ही वेबसाइट पर डाले गए डेटा को सर्वर तक सुरक्षित रूप से रखते हैं. 

Public key और Private Key के बारे में ( Public key and Private key in Hindi) में बता दें कि –

SSL में ये दोनों का अलग – अलग काम होता है.Private Key Plain Text को इंक्रिप्ट करता है.यानी कि जब कोई डेटा वेबसाइट पर डाली जाती है तो Private Key उसे कोड वर्ड में बदल देता है.Public Key इंक्रिप्टेड डाटा को Decrypt यानी कोड वर्ड को पुनः Plain Text में  बदल देता है.

SSL certificate  के प्रकार – Types of SSL in Hindi

अलग-अलग तरह की वेबसाइट के लिए जरूरत के हिसाब से कई तरह के वे एसएसएल सर्टिफिकेट मौजूद है.जैसे कि कोई बड़ी कंपनी का वेबसाइट है तो उसे अलग तरह के SSL Certificate की जरूरत होती है.जबकि कोई एक सामान्य वेबसाइट है तो उसके लिए कम क्षमता वाले एसएसएल सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है.

1. Single SSL-

इस तरीके के एसएसएल सर्टिफिकेट को एक वेबसाइट या एक Sub Domains की सुरक्षा के लिए उपयोग किए जाते हैं.

 2. Wildcard SSL –

इस तरह के एसएसएल सर्टिफिकेट भी केवल एक वेबसाइट के लिए ही उपयोग किए जाते हैं. लेकिन यह एक वेबसाइट के साथ-साथ उसके Unlimited Sub Domain को भी सुरक्षित रखता है.

3. Multi Domain SSL –

इस तरह की Certificate एक-दो नहीं लगभग 250 वेबसाइट के Sub Domains की सुरक्षा के लिए उपयोग किए जाते हैं.

4. Domain Validation SSL –

यह सबसे सस्ता SSL सर्टिफिकेट होता है.यह आमतौर से किसी एक डोमेन को वेरिफाइ करने के लिए उपयोग में लाया जाता है,मीडियम लेवल की सिक्योरिटी प्रोवाइड करता है.यह आमतौर से छोटे-मोटे वेबसाइट द्वारा ही उपयोग किया जाता है.इस तरह के एसएसएल सर्टिफिकेट को आप कुछ ही मिनट में खरीद सकते हैं तथा install कर सकते हैं.

5. Organisation Validation SSL –

इस तरह का SSL बड़ी कंपनियों द्वारा उपयोग में लाया जाता है.ऐसे SSL इनक्रिप्शन के साथ-साथ वेबसाइट का वेरिफिकेशन भी करते हैं.इसके बाद ही SSL सर्टिफिकेट जारी किया जाता है.इस तरह के सर्टिफिकेट आपको आवेदन करने के कुछ घंटे बाद से लेकर एक से दी दिन के अंदर मिल जाएगा.

6. Extended Validation (EV) –

इस तरह का एसएसएल सबसे High Security SSL certificate माना जाता है.इसे जारी करने से पहले आवेदन करने वाली कंपनी के सत्यता की जांच की जाती है.यानी कि डोमेन नेम की वेरिफिकेशन के अलावा एड्रेस, बिजनेस इत्यादि समेत सभी चीजें पहले वेरिफाइ की जाती है.

इस तरह का SSL पहले से तय एक कड़े नियम का पालन करने के बाद ही दिया जाता है.इस तरह का एसएसएल आमतौर से बैंक या बड़ी- बड़ी  वेबसाइट्स द्वारा ही उपयोग में लाया जाता है.यह एसएसएल सर्टिफिकेट आवेदन करने के दो-चार दिन से लेकर कुछ हफ्तों के अंदर जारी किया जाता है.कंपनी इस तरह के एसएसएल सर्टिफिकेट जारी करने से पहले पूरी वेरिफिकेशन करती है.

SSL certificates का महत्व – SSL certificates importance in Hindi.

SSL के महत्व (Importance of SSL in hindi ) की बात करें तो-

वर्तमान समय में एक वेबसाइट के लिए एसएसएल सर्टिफिकेट बेहद महत्वपूर्ण होता है.अगर आप ब्लॉगिंग के लिए कोई वेबसाइट चला रहे हैं तो उस पर SSL Certificate होना बेहद जरूरी है.क्योंकि गूगल की नीति के अनुसार SSL Enabled Website को रैंकिंग में प्राथमिकता दी जाती है.इसी तरह अगर आप कोई ऐसी वेबसाइट चला रहे हैं,जिसके माध्यम से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन होता है,तो ऐसी वेबसाइट पर भी एसएसएल सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है,

बिना एसएसएल सर्टिफिकेट के ट्रांजैक्शन आप नहीं कर पाएंगे,वेबसाइट के सुरक्षा की दृष्टि से SSL सर्टिफिकेट काफी महत्वपूर्ण होता है.SSL Certificate वाले वेबसाइट से डाटा चोरी की संभावना काफी कम होती है.क्योंकि वेबसाइट पर जो कुछ भी डाटा डाली जाती है, वह वेबसाइट से सीधे server में इंक्रिप्टेड मोड में जाती है.इस कारण में थर्ड पार्टी द्वारा सेंधमारी की कोई संभावना नहीं होती है.

एसएसएल सर्टिफिकेट का फायदा यह होता है कि इसे लेने वाले वेबसाइट पर लोग आसानी से भरोसा करते हैं.क्योंकि यहां डाटा चोरी की संभावना नहीं होती है.इसके अलावा और एसएसएल होने से वेबसाइट प्रभावी लगता है.

SSL certificates की कीमत कितनी होती है – SSL certificates price in Hindi.

SSL की कीमत इस बार पर निर्भर करती है कि आप किस तरह के एसएसएल सर्टिफिकेट ले रहे हैं.आमतौर से अगर एक सिंपल वेबसाइट के लिए आप एसएसएल सर्टिफिकेट लेंगे तो इसकी कीमत 1 साल के लिए लगभग 500 से 1000 के आसपास पड़ती है.इसी तरह अन्य तरह के SSL Certificate आप लेते हैं तो आप की आवश्यकता के हिसाब से एसएसएल सर्टिफिकेट की कीमत भी बढ़ती जाती है.

अगर आपने अपनी नई – नई वेबसाइट शुरू की है तथा आप फ्री में एसएसएल सर्टिफिकेट लेना चाहते हैं तो यह भी संभव है.वर्तमान समय में दर्जनों ऐसी वेबसाइट है जो कि मुफ्त में आपको एसएसएल सर्टिफिकेट उपलब्ध करवाती है.आप चाहे तो गूगल पर Free SSL Certificate लिख कर सर्च करें.

उसके बाद अपनी सुविधा अनुसार किसी भी वेबसाइट से मुफ्त में SSL सर्टिफिकेट ले सकते हैं.हालांकि अधिकतर मुफ्त सर्टिफिकेट एक नियत समय के लिए ही होती है.एक बार Expire होने पर इसे आपको फिर से Activate करना होगा.

SSL Certificate कौन देता है –  who issues SSL certificates ?

SSL Certificate जारी करने के लिए पूरी संस्था काम करती है.एसएसएल सर्टिफिकेट जारी करने वाली संस्था का नाम Certificate Authority (CA) है.आमतौर से  एसएसएल सर्टिफिकेट ऐसी कंपनियों द्वारा बेचा जाता है जो कि डोमेन नेम, होस्टिंग इत्यादि बेचती है.SSL Certificate बेचने वाली ऐसी दर्जनों कंपनियां है जहां से आप इसे खरीद सकते हैं.

आमतौर से बात करें तो –

    • गोडैडी (Godaddy),

    • होस्टगेटर (Hostgator),

    • बिग रॉक (Bigrock),

    • होस्टिंग्जर (Hostinger)

इत्यादि ऐसी कंपनियां है जो कि एसएसएल सर्टिफिकेट बेचती है. इसके अलावा भी सैकड़ों की संख्या में ऐसी वेबसाइट है जो कि एसएसएल सर्टिफिकेट बेचती हैं.

आप अपनी सुविधा अनुसार कहीं से भी एसएसएल सर्टिफिकेट खरीद सकते हैं.

अपनी वेबसाइट पर एसएसएल सर्टिफिकेट कैसे लगाएं – How do I implement SSL on my site ?

किसी भी वेबसाइट पर एसएसएल सर्टिफिकेट Install करना ज्यादा मुश्किल नहीं है.एक बार आप किसी वेबसाइट से अपनी सुविधा अनुसार एसएसएल सर्टिफिकेट खरीद लें.इसके बाद आपने जहां से से SSL सर्टिफिकेट खरीदी है, उस साइट पर लॉगिन कर लें। लॉगिन करने के बाद कुछ स्टेप्स को फॉलो करने पर आप आसानी से इसे install कर सकते हैं.अलग-अलग वेबसाइट पर इसे एक्टिवेट करने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है.

कुछ वेबसाइट ऐसे हैं जहां खरीदने के बाद एसएसएल सर्टिफिकेट एक्टिवेट करने का ऑप्शन आपको लॉग इन करने के साथ ही दिखाई देगा.वहां क्लिक करने के बाद, जो जानकारी मांगी जा रही है वह उपलब्ध करवा दें.इसके बाद आप आसानी से एसएसएल सर्टिफिकेट इंस्टाल कर सकते हैं.

अगर आपने एसएसएल सर्टिफिकेट खरीद लिया है.लेकिन लॉगइन करते ही आपके सामने एसएसएल सर्टिफिकेट एक्टिवेट करने का ऑप्शन नहीं आता है तो आप My Order के विकल्प में जाएं या डैशबोर्ड के विकल्प पर क्लिक करें.वह आपको SSL Certificate का विकल्प दिखाई देगा। उस पर क्लिक करें.क्लिक करने के बाद नया पेज खुलेगा. उस पेज पर आपसे आपके डोमेन नेम, email id मांगी जाएगी.इसके अलावा जो भी जानकारी मांगी जाएगी उन सब जानकारी को भर दें.

सभी जानकारी देने के बाद आपके सामने सर्टिफिकेट इंस्टॉल करने का विकल्प भी आ जाएगा.आमतौर से सर्टिफिकेट इंस्टॉल होने में कुछ मिनट से लेकर आधे घंटे तक का समय लग सकता है.अगर आप ब्लॉगिंग के क्षेत्र में नए हैं तथा आप एसएसएल सर्टिफिकेट इंस्टॉल नहीं कर पा रहे हैं तो बेहतर है कि किसी विशेषज्ञ की मदद ले कर इंस्टाल करवालें.

निष्कर्ष – Conclusion

आप किसी भी तरह का वेबसाइट चला रहे हों, उस पर SSL Certificate Activate ज़रूर कर लें.क्योंकि अधिकतर ब्राउज़र एसएसएल सर्टिफिकेट वाले वेबसाइट को आसानी से खोल देते हैं.लेकिन बिना SSL वाले वेबसाइट को खतरनाक बता कर एक बार में नहीं खोलते है.इसके अलावा गूगल रैंकिंग के हिसाब से भी देखे तो एसएसएल सर्टिफिकेट महत्वपूर्ण होता है.इन सबसे अलग एक User SSL सर्टिफिकेट वाले वेबसाइट पर ज्यादा भरोसा करता है.सएसएल सर्टिफिकेट वाले वेबसाइट ज्यादा Authentic लगते हैं.इसलिए किसी वेबसाइट पर एसएसएल सर्टिफिकेट होना बेहद जरूरी है.सबसे महत्वपूर्ण, किसी भी वेबसाइट की सुरक्षा की दृष्टि से भी एसएसएल सर्टिफिकेट बेहद महत्वपूर्ण है.इस लिए SSL Certificate लेना ही सही होता है.