Waste Management Kya Hai

Waste Management Kya Hai. आप अपने दैनिक जीवन में जिस भी वस्तु का इस्तेमाल करते हैं उसके खराब होने पर आप उसे फेंक देते हैं। आप किसी भी वस्तु को तभी तक अपने पास रखते हैं जब तक की वो आपके काम आता है, उसके बाद तो वो कचरा हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है की उस खराब वस्तु का हमारे वातावरण पर क्या असर पड़ेगा?

खराब वस्तु को फेंकने से पहले आपको एक बार ये जरूर सोचना चाहिए की क्या हम इसे किसी और तरीके से कुछ दिन और इस्तेमाल कर सकते हैं। क्योंकि जब आप उसे फेंक देंगे तो वो कचरे में चला जाएगा और वातावरण को नुकसान पहुंचाएगा। इस लेख में हम इसी समस्या को देखते हुए कचरा प्रबंधन के बारे में जानेंगे और इसे कम करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।

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1 Waste Management Kya Hai – कचरा प्रबंधन क्या है?

Waste Management Kya Hai – कचरा प्रबंधन क्या है?

कचरा प्रबंधन ऐसी प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत कचरे को इकट्ठा करने से लेकर उसे dispose करने तक का काम होता है। इसमें कचरे को इकट्ठा करने के बाद उसे सही जगह तक पहुँचाने के बाद उसका reuse,recycle और disposal जैसी प्रक्रिया होती है। इसमें तकनीक और कानून की अहम भूमिका होती है।

कचरा कई प्रकार का होता है जैसे की कागज कचरा, धातु कचरा, ई-कचरा, कृषि कचरा, प्लास्टिक कचरा आदि। इन अलग-अलग प्रकार के कचरों का प्रबंधन अलग-अलग प्रक्रिया से किया जा सकता है।

कुछ तरह के कचरे समय के साथ सड़ कर मिट्टी में मिल जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी कचरे होते हैं जो सदियों पड़े रहते हैं और साथ ही मानव स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए कचरे का सही प्रबंधन करना अति आवश्यक है नहीं तो ये सभी जीवों को काफी नुकसान पहुँचा सकते हैं।

कचरा प्रबंधन के सिद्धांत – Principal Of Waste Management

Waste Management Kya Hai, कचरा प्रबंधन के कुछ सिद्धांत हैं जिनका पालन करके कचरे को अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए कचरे का पदानुक्रम प्रक्रिया के अनुसार प्रबंध किया जाता है। तो चलिए कचरा प्रबंधन के सिद्धांत को एक-एक करके जानते हैं जो पदानुक्रम में नीचे दिया गया है।

1.कचरा कम करना-Waste Reduction :

कचरा प्रबंधन सिद्धांत का सबसे पहला सिद्धांत हैं कचरा कम उत्पन्न करना। यदि किसी वस्तु को कचरा बनने से पहले ही उसे रोक दिया जाए तो इससे कचरा प्रबंधन में काफी मदद मिलेगी। इससे कचरा प्रबंधन के आगे की प्रक्रिया नहीं करनी पड़ेगी।

क्योंकि कचरा प्रबंधन करने में उसके transport, recycle और अन्य प्रक्रिया में लगने वाली लागत के अलावा उसकी खरीदारी की लागत भी शामिल होती है। इसलिए सबसे बेहतर यही होगा कि कचरा कम उत्पन्न किया जाए। इसके लिए हमें किसी भी वस्तु को तब तक नहीं फेंकना चाहिए जब तक की उसका इस्तेमाल किया जा सके।

2.फिर से इस्तेमाल-Reuse

Waste Management Kya Hai, कचरा प्रबंधन का दूसरा सिद्धांत है reuse, यानी की फिर से इस्तेमाल करना। कचरा प्रबंधन के लिए किसी भी वस्तु को फिर से इस्तेमाल करने की कोशिश करनी चाहिए। हो सकता है की कुछ repair करने के बाद उसे फिर से इस्तेमाल किया जा सके अन्यथा उसे किसी अन्य काम में लाया जा सके।

आप ऐसा भी कर सकते हैं की जो वस्तु आप फेंकने जा रहे हैं उसे दूसरों को दे सकते हैं ताकि वो उनके काम आ सके। इससे उसका reuse हो जाएगा और वो कचरा बनने से बच जाएगा।

3.रीसाइकल-Recycle

कचरा प्रबंधन की अगली प्रक्रिया है रीसाइकल करना। इसमें कचरा को इकट्ठा कर उन्हे पुनः उपयोग के योग्य बनाया जाता है। इसमें तकनीक के जरिए कचरे को कई तरह की प्रक्रिया से process किया जाता और वस्तु फिर से नए जैसे हो जाती है।

कचरा प्रबंधन में इसका इस्तेमाल तभी करना चाहिए जब ऊपर दिए गए तरीकों से काम ना हो पाए।  

4.ऊर्जा पुनः प्राप्ती-Energy recovery

कचरा प्रबंधन की अगली प्रक्रिया है ऊर्जा की पुनः प्राप्ती, ये तब किया जाता है जब ऊपर दिए गए प्रक्रिया से कचरा प्रबंधन ना हो सके। इसमें कचरे को disposal करने से पहले उससे ऊर्जा प्राप्त करने की कोशिश की जाती है। क्योंकि कुछ कचरों में ऐसी ऊर्जा होती है जिन्हें हम इस्तेमाल में ला सकते हैं।


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5.कचरा निपटान-Waste Disposal

ये कचरा प्रबंधन की अंतिम प्रक्रिया है, जब ऊपर दिए गए प्रक्रिया में से कोई काम नहीं आता तब इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कचरे को जमीन के अंदर दफ्न कर दिया जाता है। लेकिन इसके लिए ये सुनिश्चित करना अति आवश्यक है की जमीन में दफन किया गया कचरा वातावरण में नहीं फैलेगा क्योंकि इससे वातावरण और जीव दोनों को क्षति हो सकती है।

Waste Management Kya Hai

कचरा प्रबंधन करने के लिए कई तरह की क्रिया को step-wise करना पड़ता है। इसके लिए सबसे पहले कचरे को इकट्ठा करना, उसे एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाना, उनकी छँटाई-बिनाई करना, पुनः इस्तेमाल, रीसाइकल और dispose कर सकते हैं।

चलिए एक-एक प्रक्रिया को विस्तृत रूप से समझते हैं और जानते हैं कि इन्हे कैसे पूरा किया जा सकता है।

इकट्ठा करना-Collection

कचरा प्रबंधन की पहली प्रक्रिया है उसे इकट्ठा करना। कचरा इकट्ठा करने के लिए हर व्यक्ति को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की कचरा ऐसी जगह ही फेंके जहां से उसे आसानी से इकट्ठा किया जा सके। जैसे की आप अपने घर में कई तरह के dustbin रख सकते हैं और उसमें कचरा रखें और नियमित उसे पास के कचरा वाले स्थान पर फेंक दें। इससे कचरा हमारे वातावरण में इधर-उधर नहीं फैलेगा।   

सही जगह पहुंचाना-Transportation

कचरा इकट्ठा होने के उसे बाद सही जगह पहुंचाकर उसे reuse और रीसाइकल किया जा सकता है। जैसे की यदि कोई वस्तु आपके लिए खराब हो चुकी है तो हो सकता है की कोई अन्य व्यक्ति उसका अन्य इस्तेमाल कर ले। इसलिए कचरा को कचरा फैक्ट्री, कबाड़ी घर और ऐसी अन्य जगहों पर पहुंचाना पड़ेगा जहां उसका सही प्रबंधन किया जा सके।

छँटाई बिनाई करना-Separation

Waste Management Kaise Kare, कचरा इकट्ठा करने के बाद उसकी छँटाई-बिनाई करके एक प्रकार के कचरों को एक जगह करना होगा। जैसे की प्लास्टिक को एक साथ,धातु को एक साथ, मोबाईल को एक साथ आदि। ऐसा करने से इन सभी तरह के कचरों का अलग-अलग प्रबंधन किया जा सकता है।

पुनः इस्तेमाल करना-Reuse

कचरों की छँटाई-बिनाई करने के बाद उनमे से पुनः इस्तेमाल के लायक वस्तुओं को अलग किया जा सकता है और उसे इस्तेमाल में लाया जा सकते है। इसके लिए आपको उसकी थोड़ी सी मरम्मत भी करनी पड़ सकती है।

रीसाइकल-Recycle

ऊपर दी हुई प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद जो कचरा बच जाता है उसे रीसाइकल करने की कोशिश करनी चाहिए। अगर उसे रीसाइकल कर दिया गया तो फिर से उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। उससे कोई अन्य वस्तु बनाई जा सकती है या फिर से वही वस्तु बनाई जा सकती है।

उदाहरण के लिए धातु के कचरों को गला कर फिर से उनसे नई वस्तु बनाई जा सकती है। कागज के कचरों को भी रीसाइकल किया जा सकता है। रीसाइकल करने के लिए तकनीक और फैक्ट्री की आवश्यकता पड़ सकती है।

जमीन में दफ्न-landfill Dispose

ऐसे कचरे जो ऊपर के किसी भी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने लायक नहीं हैं उन्हे जमीन में दफ्न कर दिया जाए तो इससे कचरा प्रबंधन पूरा हो जाएगा। लेकिन इसमें भी ध्यान रखने वाली बात ये है की इन्हें दफ्न करते वक्त लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये वातावरण में फैल सकते हैं इसलिए इन्हे ठीक से बंद व्यवस्था में दफ्न करना चाहिए।

आगे विभिन्न प्रकार के कचरों और उनके प्रबंधन का तरीका दिया गया है। इन्हें पढ़ने के बाद आपको इस बात का पता लग जाएगा की कचरा प्रबंधन के लिए कौन सी प्रक्रिया किसके लिए ठीक रहेगी।

कागज वाले कचरा का प्रबंधन – Paper Waste Management

कागज के कचरों को बहुत अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। कागज का प्राथमिक उपयोग लिखने के लिए किया जाता है और इसके अलावा किसी चीज का लिफाफा बनाने के लिए भी किया जाता है।

सबसे पहली बात हम कागज के इस्तेमाल को कम कर सकते हैं और इसे कचरा बनने से रोक सकते हैं। जैसे की हम बाजार में बहुत सारे जगह ठेलों से समान लेते हैं और वो हमें कागज पर मिलता है हम वो समान का उपयोग तो कर लेते हैं लेकिन उस कागज को कचरा बनाकर फेंक देते हैं। यहाँ पर इस कागज की जगह आप अपने घर से स्टील या अन्य धातु का बर्तन ले जा सकते हैं और उस कागज को बचा सकते हैं।

दूसरा स्टेप आता है reuse का और हम कागज को कई तरह से reuse कर सकते हैं। जैसे की उससे कोई cover बनाना, pen या pencil रखने के लिए डब्बा बनाना आदि। इसके बाद इसे recycle करके फिर से नया कागज भी बनाया जा सकता है।

कांच का कचरा – Glass Waste Management

ग्लास के कचरों का प्रबंधन करने के लिए इन्हें इकट्ठा करते वक्त सावधानी रखनी चाहिए क्योंकि नुकीले कांच किसी भी इंसान या जानवर को चुभ सकते हैं और घाव कर सकते हैं। ग्लास के कचरों को reuse किया जा सकता है क्योंकि आप इन्हें घर में container के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

यदि कांच टूटा-फूटा नहीं है तो आप इसमें घरेलू सामान रख सकते हैं।

जहां तक इसके रीसाइकल की बात है तो इसके लिए कांच को फोड़कर बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में चुरा बना लिया जाता है उसके बाद इसे पिघलाकर मनचाहे आकार में ढाल दिया जाता है। इसके चुरे को cullet कहा जाता है। इसके बेहतर recycling के लिए इसमें से अशुद्धता को बाहर करना जरूरी है।

कांच को कई बार रीसाइकल किया जा सकता है और इसलिए इसके landfill disposal की आवश्यकता नहीं पड़ती।

धातु कचरा प्रबंधन – Metal Waste Management

Waste Management Kya Hai, धातु कचरा का प्रबंधन करने के लिए reuse और recycle सबसे बेहतर तरीका है। क्योंकि इन्हें बहुत बार रीसाइकल किया जा सकता है और फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इन्हें थोड़ी सी मरम्मत करने के बाद reuse भी किया जा सकता है।

धातु को रीसाइकल करने के लिए पहले उसे संकुचित कर दिया जाता है जिससे की वो कम जगह में रखा जा सके। उसके बाद उसे और छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है इससे धातु का सतह क्षेत्रफल और बढ़ जाता है जिससे उसे पिघलाने में कम ऊर्जा लगती है। उसके बाद धातु का शुद्धिकरण किया जाता है और फिर उसे मनचाहे आकार में ढालकर नई वस्तु बनाई जाती है।

Organic Waste Management Kya Hai – जैविक कचरा प्रबंधन

जैविक कचरा का प्रबंधन करने का सबसे बढ़िया तरीका है उसे सड़ाकर खाद बनाना (compost) क्योंकि अधिकतर जैविक कचरे आसानी से सड़ाए जा सकते हैं। इन्हें सड़ाकर खाद बनाने के बाद reuse के रूप में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन्हें जल्दी से सड़ाने के लिए microorganism जैसे की bacteria या fungus का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए निश्चित तापमान और आर्द्रता होना जरूरी है तभी ये bacteria कम समय में जल्दी से उसे सड़ा पाएंगे।

इस प्रक्रिया में सुरक्षा की दृष्टि से कुछ बातों पर ध्यान रखना चाहिए जैसे कि जिस organic waste को काम्पोस्ट बनाना है उसमें किसी तरह का हानिकारक पदार्थ ना हो। खाद बनने के बाद उसकी गुणवत्ता और pH मिट्टी के अनुकूल होना चाहिए।



ई-कचरा प्रबंधन – E-Waste Management

ई-कचरा का प्रबंधन ठीक रूप से होना अति आवश्यक है क्योंकि ये वातावरण के लिए काफी खतरनाक हो सकता है। e-waste का मतलब होता है electronic waste और इनके अंदर बहुत सारे खतरनाक पदार्थ पाए जाते हैं जो कई तरह की बीमारियां करते हैं इसलिए इनका प्रबंधन सावधानी से होना चाहिए।

इनके प्रबंधन में reuse और recycle का इस्तेमाल करना चाहिए। इन्हें इकट्ठा करते वक्त खास तरह का कपड़ा पहनना चाहिए ताकि labour का सीधा संपर्क ई-कचरा से ना हो। उसके बाद इनकी छँटाई करके reuse करने लायक वस्तुओं को एक जगह और रीसाइकल करने लायक वस्तुओं को एक जगह इकट्ठा कर देना चाहिए।

प्लास्टिक कचरा का प्रबंधन – Plastic Waste Management

प्लास्टिक कचरा का प्रबंधन काफी मुश्किल काम है क्योंकि इन्हें सड़ाना-गलाना और इसकी recycling करना या तो काफी मुश्किल है या वातावरण के लिए खतरनाक है। इसलिए इसका reuse करना काफी सही रहेगा और बहुत सारे देश इसका इस्तेमाल सड़क बनाने के लिए कर रहे हैं और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन का ये सबसे अच्छा उदाहरण है।

इसके अलावा हमें प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने और बार-बार इस्तेमाल करने पर ध्यान देना चाहिए। प्लास्टिक कचरा प्रबंधन का अंतिम चरण है disposal और इसके लिए incineration नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इसके ठीक से maintenance नहीं होने की वजह से कई खतरनाक गैस उत्पन्न होते हैं।

इसलिए इसका कम इस्तेमाल करना ही अच्छा प्रबंधन है।

लकड़ी कचरा प्रबंधन – Wood Waste Management

लकड़ी का इस्तेमाल हर घर में होता है कहीं कुर्सी-मेज बनाने के लिए तो कहीं दरवाजा बनाने के लिए। ऐसे में जब इन्हें बनाया जाता है तो इनकी कटाई करते वक्त छोटे-छोटे लकड़ी के टुकड़ों को फेंक दिया जाता है। इसकी गढ़ाई करते वक्त भी लकड़ी के पतले और छोटे टुकड़े निकलते हैं जिन्हें फेंक दिया जाता है।

इसके अलावा जब लकड़ी का सामान पुराना हो जाता है तब भी उसे कचरे में फेंक दिया जाता है।

लकड़ी से होने वाले इन सभी कचरों को इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इन्हें रीसाइकल करके इनका पेपर बनाया जा सकता है और building material बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इन्हें ऊर्जा के लिए ईंधन के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

मेडिकल कचरा प्रबंधन – Medical Waste Management

स्वास्थ्य परीक्षण या चिकित्सा के दौरान निकलने वाले कचरे medical कचरा के अंतर्गत आते हैं और ये चार प्रकार के होते हैं- संक्रामक, खतरनाक ,रेडीओऐक्टिव, और साधारण। इन सभी तरह के कचरों का अलग-अलग तरीके से प्रबंधन किया जाता है।

संक्रामक कचरा प्रबंधन-  संक्रामक कचरों के अंतर्गत मनुष्य/जानवर के tissue, खून से लगा bandage, gloves आदि आते हैं। इन कचरों के प्रबंधन के लिए सबसे पहले इन्हे disinfect किए जाना चाहिए।

इसके लिए WHO या राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्था द्वारा दी गई guidelines का पालन करना चाहिए। उसके बाद इन्हीं स्वास्थ्य संस्था के निर्देश अनुसार ये सुनिश्चित करना चाहिए की कौन से कचरे का क्या प्रबंधन किया जाए।

खतरनाक कचरा प्रबंधन- स्वास्थ्य क्षेत्र में सुई, ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जाने वाला चाकू और इसी तरह के अन्य औजार काफी खतरनाक होते हैं। इसलिए इनके प्रबंधन में विशेष सावधानी रखनी चाहिए। स्वास्थ्य संस्था के निर्देश अनुसार इन्हें इकट्ठा करके इन्हें recycle या dispose करना चाहिए।

रेडीओऐक्टिव कचरा– इस तरह का कचरा स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिकतर कैंसर की चिकित्सा में निकलता है। ये काफी नुकसानदायक होते हैं इसलिए इनके प्रबंधन के लिए professional लोगों को रखना चाहिए ताकि ये वातावरण में ना फैले।

साधारण कचरा- चिकित्सा क्षेत्र में साधरण कचरों को आप साधारण कचरा प्रबंधन के नियम अनुसार, reuse, recycle या dispose कर सकते हैं।

Best ways to manage waste – खतरनाक कचरा प्रबंधन – Hazardous Waste Management

ऐसे कचरे जिनसे मानव,जानवर या पौधों को नुकसान पहुंचता हो वो खतरनाक कचरा के अंतर्गत आते हैं। जैसे कोई नुकीली/धारदार धातु या शीशा, खतरनाक केमिकल, खतरनाक धुआँ, आदि।

इनके प्रबंधन के लिए reuse, recycle और disposal में से जो उचित लगे उसे अपना सकते हैं। इनके disposal के वक्त ऐसे स्थान का चुनाव करना चाहिए जहां पर लोग नहीं रहते हैं और साथ ही वहाँ बोर्ड लगाकर dispose किये हुए खतरनाक कचरे के बारे में जानकारी भी देना चाहिए।

बैटरी कचरा प्रबंधन – Battery Waste Management

बैटरी कचरा काफी तेजी से बढ़ रहा है और ये ई-कचरा का एक हिस्सा है। इसके प्रबंधन में reuse,recycle और disposal का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें कुछ बैटरी ऐसी होती हैं जिन्हें कुछ मरम्मत के बाद फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है।

बैटरी की recycling के लिए व्यवस्था करनी चाहिए क्योंकि कुछ बैटरी जैसे की lithium ion, को रीसाइकल किया जा सकता है। बैटरी को dispose करने के बहुत सारे तरीके अपनाए जा सकते हैं। इसके लिए chemical precipitation, solvent extraction, mechanical separation method की मदद ली जा सकती है। जिससे बैटरी के केमिकल को अलग-अलग किया जा सके।



लिक्विड कचरा प्रबंधन – Liquid Waste Management

Liquid यानी तरल कचरा, इसका प्रबंधन करना बेहद जरूरी है क्योंकि ये तरल रूप में होने की वजह से फैल सकता है और अपना दायरा बढ़ा सकता है। यदि ये पानी के बड़े स्त्रोत में मिल जाए तो पानी की बहुत अधिक मात्रा को प्रदूषित कर सकता है।

इसलिए तरल कचरा का प्रबंधन करते वक्त निम्न बातों का ध्यान रखें-

  • तरल कचरों को पानी में ना छोड़ें और ना ही वातावरण में
  • यदि तरल कचरे को सुखाकर उसे ठोस बनाना संभव हो तो ये जरूर करें
  • अपने फैक्ट्री के मजदूर और अन्य काम करने वाले लोगों को इसके बारे में जागरूक जरूर करें
  • यदि किसी कचरे को फ़िल्टर कर उसकी अशुद्धि निकाल ली जाए तो उसे वातावरण में छोड़ा जा सकता है।

गैसीय कचरा प्रबंधन – Gaseous Waste Management

गैसीय कचरे वातावरण में बड़ी आसानी से फैल सकते हैं और हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनका प्रबंधन यही है की इन्हें वायुमंडल में फैलने से रोका जाए और जितना हो सके इन्हें किसी काम में लाया जाए।

कुछ खतरनाक गैस जैसे SO2 , Cl2 ,NH3 , H2S, आदि, इनको उचित तरल की मदद से wet scrubber में अवशोषित कराया जा सकता है जिससे ये तरल में घुल जाएंगे। इसी तरह से हम सभी गैसीय कचरों को रोक सकते हैं, यही इनका प्रबंधन है।   

Best ways to manage waste – कृषि कचरा प्रबंधन – Agriculture Waste Management

कृषि के अवशेष को आग लगाकर जला देने से वातावरण को भारी नुकसान होता है। लेकिन यदि इसका ठीक से प्रबंधन करें तो इसे कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है और लाभ हो सकता है।

कृषि अवशेष को एकत्रित कर उसे सड़ाकर उससे जैविक खाद बनाई जा सकती है। इसे इकट्ठा कर इससे एथानॉल बनाया जा सकता है जिसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इतना ही नहीं बहुत तरह के कृषि अवशेष पशुओं के चारा के काम आता है।

घरेलू कचरा प्रबंधन – Domestic Waste Management

Waste Management Kya Hai, घरेलू कचरा का प्रबंधन उसके प्रकार पर निर्भर करता है जैसे की यदि वो कचरा घर के किचन से संबंधित है यानी की बचा हुआ खाना या सब्जी आदि का छिलका तो आप बचा हुआ खाना किसी गरीब को खिला सकते हैं अन्यथा इन्हें किसी जानवर को खिला सकते हैं। अगर ये भी ना हो पाए तो इन्हें कहीं इकट्ठा कर उसे सड़ाकर उससे जैविक खाद बना सकते हैं।

लेकिन घरेलू कचरे में कुछ अन्य तरह के कचरे भी हो सकते हैं जैसे की धातु कचरा, कागज कचरा,प्लास्टिक कचरा आदि। इसलिए इनका प्रबंधन इनके प्रकार के अनुसार करें।  

जानवर अपशिष्ट प्रबंधन – Animal Waste Management

जानवर से संबंधित कचरा मतलब की जानवरों के मूत्र और गोबर। जैसा की आप सभी को पता है गोबर से खाद, गैस और उपली बनाई जा सकती है। इसमें गैस और उपली को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

लेकिन इनके बेहतर प्रबंधन के जरूरी है की इन्हे ठीक तरह से इकट्ठा किया जाए और विज्ञान की मदद से इसे और बेहतर किया जाए। क्योंकि इसमें कई stage पर कुछ नुकसानदायक गैस निकलती हैं जिन्हे रोकना आवश्यक है।



मानव कचरा प्रबंधन – Human Waste Management

यहाँ मानव कचरा का मतलब इंसान के मल/मूत्र से है। इनका प्रबंधन हम शौचालय के जरिए ही कर सकते हैं। क्योंकि इससे खाद बनाया जा सकता है और उसे खेतों में इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन चूंकि इसमें मानव के मल/मूत्र के जरिए parasite और अन्य सूक्ष्मजीव खेतों में फैल सकते हैं और उसके बाद अन्य व्यक्ति तक पहुँच सकते हैं इसलिए इनका निवारण करना जरूरी है।

इसके अलावा खेतों में डालने के लिए इनका pH भी जांच करना जरूरी है ताकि ये खेत के अनुकूल रहे।

कसाई खाना कचरा का प्रबंधन – Slaughter House Waste Management

कसाई खाने से पशुओं के अवशेष इधर-उधर फेंकने से अच्छा है की इन्हें दूसरे जानवरों को खिला दिया जाए। वैसे कसाई खाने से पशुओं के चमड़े और पंख ही कचरे के रूप में बचते हैं क्योंकि बाकी सब तो अन्य जानवर खाकर खत्म कर देते हैं।

इसके अलावा पशुओं को काटते समय खून को इकट्ठा करने का प्रबंध नहीं किया जाता है। और ये खून नदियों में बहकर काफी अधिक प्रदूषण करता है। इन्हें इकट्ठा करके pharmaceutical इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

निष्कर्ष:

कचरा प्रबंधन अपने आप में बहुत बड़ा विषय है लेकिन इसके सिद्धांत के अनुसार reduce, reuse, recycle और disposal के माध्यम से हम इस पर काबू पा सकते हैं। चूंकि अलग-अलग प्रकार के कचरों का प्रबंधन भी अलग-अलग तरीकों से होता है। इस लेख में हमने बस ये बताने की कोशिश की है की कुछ तरह के कचरे के प्रबंधन के लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं।

कचरा प्रबंधन के बारे में जागरूकता फैलाने से लोग इसके बारे में जानेंगे और इससे रोजगार के अवसर खुलेंगे और कचरा का ठीक से प्रबंधन भी हो पाएगा। यदि आपका कोई सवाल हो तो कमेन्ट करके जरूर पूछें हम जल्द ही आपको उत्तर देने की कोशिश करेंगे।  उम्मीद करते है आपको ये Article Waste Management Kya Hai अच्छा लगा. आपको ये Article अच्छा लगा तो ये Article को Share करे.


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