World Health Organisation.HINDI मी जानिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की वारे में

World Health Organization In Hindi. हाल ही में जब भारत मे कोरोना वायरस ने रफ्तार पकड़ी थी तब एक संस्थान का नाम बार-बार सामने आ रहा था जो था WHO अर्थात World Health Organization! वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन अर्थात विश्व स्वास्थ्य संगठन एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसका नाम पिछले कुछ समय से अखबारों व टीवी चैनल्स में छाया हुआ था।

सोशल मीडिया पर भी सरकार और कई स्वास्थ्य संस्थाओं के द्वारा चलाए जा रहे Covid-19 संबंधित प्रचारों में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का नाम और इसके द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस बताई जा रही थी। हम सभी ने पर्याप्त रूप से पिछले एक साल में WHO का नाम सुना हैं लेकिन अब भी कई लोग WHO के बारे में सटीक रूप से नहीं जानते, अगर आप भी उन्ही लोगो मे से एक हो तो यह लेख पूरा पढ़े क्योंकि इस लेख में हम आपको ‘विश्व स्वास्थ्य संघटन की पूरी जानकारी’ (World Health Organization in Hindi) आसान भाषा मे देने वाले हैं।

World Health Organization In Hindi – विश्व स्वास्थ्य संघटन क्या हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन या World Health Organization को मुख्य रूप से पूरी दुनिया में डब्ल्यूएचओ (WHO) के नाम से जाना जाता हैं। जैसा ही इसके नाम से ही साफ हो जाता हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन एक प्रकार का स्वास्थ्य से संबंधित अंतराष्ट्रीय संगठन है जिसका काम दुनिया में आने वाली सभी स्वास्थ्य समस्याओं या बीमारियों से लड़ना हैं।

वर्तमान में दुनिया के करीब 1 से 94 देश विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े हुए हैं और करीब 150 देशों में इस संगठन का कार्यालय है जिससे इस संघठन की मजबूती के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता हैं।

दुनिया के सभी देशों के स्वास्थ्य स्तर को पूजा करने के उद्देश्य से शुरू किए गए विश्व स्वास्थ्य संगठन का कार्य दुनिया की सभी देशों में चल रही बीमारियों पर नजर रखना है और इस बात का ध्यान देना है कि उनका इलाज सुनिश्चित हो सके और लोगो को उन बीमारियों से बचाया जा सके।

अगर आप विश्व स्वास्थ्य संगठन अर्थात World Health Organization को सामान्य भाषा में समझना चाहते हो तो जिस तरह से द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूएनओ की स्थापना की गई थी ताकि कोई तीसरा विश्व युद्ध ना हो उसी तरह से वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना की गई है जिससे कि किसी वैश्विक महामारी की वजह से लोगों की मृत्यु ना हो।

वैश्विक महामारियों और बीमारियों को रोककर लोगों को स्वस्थ रखना ही वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन की जिम्मेदारी है। WHO की स्थापना 7 अप्रेल 1998 को की गई थी। अगर बात की जाए WHO के मुख्यालय की, तो World Health Organization का Switzerland के Geneva (जेनेवा) में स्थित हैं। क्योंकि इसकी स्थापना 7 अप्रैल को हुई थी तो हर वर्ष 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस (World Health Day) मनाया जाता है।

World Health Organization In Hindi – विश्व स्वास्थ्य संघटन कैसे काम करता हैं

WHO की काम करने की प्रणाली को समझना वाकई में काफी आसान हैं, WHO की स्थापना किसी भी वैश्विक महामारी को फैलने और उससे होने वाली लोगों की मौत को रोकने के लिए की गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्य कार्य दुनिया में चल रही सभी बीमारियों पर नजर रखना और उसे आगे फैलने से रोकना है।

एक अंतरराष्ट्रीय संगठन होने की वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन कई देश की एजेंसियों और सरकारों से जुड़ा हुआ है जिसकी वजह से किसी भी बीमारी का इलाज पाना विश्व स्वास्थ्य संगठन के लिए आसान हो जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार ‘दुनिया में चल रही है इससे संबंधित आपातकालीन शक्तियों को डायरेक्ट और कोऑर्डिनेट करने का काम वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा किया जाता है’। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का लक्ष्य स्वस्थ जीवन को आगे बढ़ाना है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का उद्देश्य क्या है

किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन या फिर कहा जाए तो एजेंसी की स्थापना करने की जाती है जब उसके पीछे कोई महत्वपूर्ण उद्देश्य हो। किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन की स्थापना करने में काफी सारे देशों का समर्थन जरूरी होता है और यह समर्थन करने मिल पाता है जब संगठन की स्थापना का उद्देश्य महत्वपूर्ण हो।

यह बात हम सभी भलीभांति जानते हैं कि विश्व युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में हजारों लाखों की तादात में लोगों की मृत्यु हुई है लेकिन विश्व युद्धों के बाद और उससे पहले कई ऐसी बीमारियां आई हैं जिन्होंने लाखो की जान ली हैं। यह बीमारियां इसी एक देश के एक क्षेत्र मे नही बल्कि कई देशों में आई हैं।

कई बार बीमारियां एक जगह से शुरू होकर दुनिया भर में फैल जाती थी लेकिन कोई कुछ नहीं कर पाता था। यही कारण हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना की गई।

World Health Organization In Hindi – विश्व स्वास्थ्य संघठन का दुनिया मे योगदान

विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना दुनिया को किसी प्रकार की वैश्विक बीमारी से बचाने के लिए की गई थी और इसमें काफी देशों ने अपना समर्थन दिया था। समय-समय पर विश्व स्वास्थ्य संगठन में कई बड़ी बीमारियों को संभालने में अपना अहम योगदान दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का दुनिया मे योगदान कुछ इस प्रकार हैं:

• विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा दुनिया के अधिकतर देश जुड़े हुए हैं और जो भी देश संगठन से जुड़ते हैं संगठन के द्वारा उस देश में संपर्क स्थापित किया जाता है। संगठन से जुड़े हुए देश में संगठन के द्वारा एक ऑफिस बनाया जाता है जो देश की एजेंसी और सरकार के साथ संगठन के प्राथमिक संपर्क बिंदु होते हैं।

• संगठन के द्वारा विभिन्न देशों में तैयार किए गए ऑफिसो से उन देशों की सरकारों की देश में चल रही बीमारियों को खत्म करने और उन्हें फैलने से रोकने में मदद की जाती है। अगर संगठन को सरकार से किसी तरह की मदद चाहिए होती है तो वहां भी इन कार्यालयों का एक सम्पर्क बिंदु के तौर पर मुख्य योगदान रहता हैं।

• विश्व स्वास्थ्य संगठन जितने भी देश से जुड़ा हुआ होता है उन सभी देशों को बाहरी देशों में फैल रही बीमारियों के बारे में सूचित करता है और बताता है कि आखिर वह देश इन बीमारियों से कैसे बच सकते हैं और दूसरे देशों में फैल रही बीमारियों को रोकने में कैसे मदद कर सकते हैं।

• जिन विदेशों में विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यालय होते हैं वहां से ही देश में स्थित अन्य संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के कार्यालयो में स्वास्थ्य संबंधित सलाह और मार्गदर्शन प्रदान किया जाता हैं।

• विश्व स्वास्थ्य संगठन ने केवल दुनिया भर की सरकारों के साथ बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय एजेंसीयो, गैर सरकारी संघटनो, कम्पनियो और स्वास्थ्य के क्षेत्र की फर्मो से भी जुड़ा हुआ होता हैं जिसकी वजह से यह इन सभी के बीच मे समन्वय स्थापित कर पाता हैं।

• विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा न केवल इस बात का ध्यान रखा जाता है कि कोई बीमारी वैश्विक तौर पर ना पहले बल्कि इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि पहले फैल चुकी बीमारियां लोगो को वापस प्रभावित ना करे और यही कारण हैं कि WHO पुरानी बीमारियों के निवारण पर भी बल देता हैं।

यह WHO (World Health Organization) के विश्व मे कुछ महत्वपूर्ण योगदान तिथि चलिए अब बात करते हैं ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन के इतिहास’ के बारे में।


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विश्व स्वास्थ्य संगठन का इतिहास – History of WHO in Hindi



World Health Organization In Hindi

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संबंधित संगठन है जिसे अब तक के सफल संगठनों में भी गिना जाता हैं। कोविड-19 के दौरान कुछ विकसित देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन पर चीन के बचाव पर तंज कसे लेकिन WHO का इतिहास वाकई में काफी रोचक रहा हैं।

विश्व स्वास्थ्य संघठन का इतिहास सरल भाषा और कम शब्दों में कुछ इस प्रकार हैं:

• 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना हुई थी और उसके 10 वर्ष बाद तक लाने के 1958 तक संगठन के द्वारा केवल विकास शील देशो पर ध्यान दिया गया। इस समय पर विकासशील देशों में कई ऐसी बीमारियां चल रही थी जो लाखों लोगों को प्रभावित कर रही थी तो ऐसे में संगठन ने अपने शुरुआती 10 सालों में केवल उन्हीं बीमारियों से राहत प्राप्त करने पर ध्यान दिया।

• इसके बाद 1958 से लेकर 1968 तक संगठन से काफी सारे देश जुड़े जिनमें से कई देश अफ्रीका में स्वतंत्र हुए उपनिवेश थे। अधिक देशों और एजेंसियों के संगठन से जुड़ने से संगठन की शक्ति भी लगातार बढ़ती गई जिससे कि संगठन को विश्व की बड़ी बीमारियों के समाधान में अधिक मदद मिलने लगी।

• विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा 1960 के दशक में विश्व रासायनिक उद्योग से हाथ मिलाया गया और इसके परिणामस्वरूप रिवर ब्लाइंडनेस और सिस्टोसोमियासिस जैसी बीमारियों के रोग वाह को से लड़ने वाले कीटनाशकों को विकसित किया जा सका। यह संगठन के द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों में एक भी हैं।

• चेचक बीमारी के बारे में तो आप सभी को पता ही होगा जो अब तक की सबसे बड़ी और अधिक फैलने वाली बीमारियों में शामिल है। अपनी स्थापना के तीसरे दशक में इसी बीमारी पर ध्यान केंद्रित करके संगठन ने इसके उन्मूलन पर कार्य किया और सफलता हासिल की।

• विश्व स्वास्थ्य संगठन के चौथे दशक की शुरुआत में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया जो ‘अल्मा अता’ नाम के एक शहर में आयोजित हुआ था। अल्मा अता शहर सोवियत संघ के एशियाई हिस्से में पड़ता है। इस सम्मेलन के मुख्य मुद्दों में प्राथमिक देखभाल, उपचारात्मक एवं निवारक उपाय और सामुदायिक भागीदारी आदि मुख्य मुद्दे थे।

• स्थापना के करीब 30 वर्षों में संगठन 134 देशों से जुड़ चुका था और सभी के साथ संगठन का समन्वय में बन चुका था। इसके बाद ही संघटन के द्वारा ‘Health for All’ (सभी को स्वस्थ जीवन मिले) का ध्येय वाक्य जारी किया गया था।

World Health Organization In Hindi

• 1981 से 1990 के बीच के दशक को संगठन के द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय पेयजल आपूर्ति एवं स्वच्छता दशक’ घोषित किया गया था। इस दशक में दुनिया के उन सभी देशों पर ध्यान केंद्रित किया गया जो पानी की समस्या से जूझ रहे थे। इस दशक में सभी सम्बन्धित देशो में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल प्रदान करने पर ध्यान दिया गया।

• इस दशक में संगठन के द्वारा जो महत्वपूर्ण कार्य किए गए उनमें से एक कार्य यह भी था कि संगठन ने सभी देशों को ब्रांड प्रोडक्ट्स की जगह सार्वजनिक सुविधाओं में उपयोग आने वाली आवश्यक दवाइयों की एक लिस्ट डेवेलप करने के लिए प्रोत्साहित किया जिससे कि देश उन दवाओं का स्टॉक भी बना सके।

• इसी दशक के दौरान संगठन ने छोटे बच्चो में होने वाली एक गम्भीर बीमारी डायरिया के नियंत्रण पर भी काम किया और सफलता भी प्राप्त की। यह ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी के द्वारा किया गया और बहुत ही सरल सिद्धांतो पर किया गया।

• विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा साल 1995 में कांगो में आये इबोला वायरस प्रकोप के निवारण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। लेकिन इस वायरस से 3 महीने तक संगठन अनभिज्ञ रहा जिसकी वजह से संघटन पर कई उंगलियां उठाई गई। साथ ही यहां पर वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी और अधिसूचना प्रणालियों की कमी भी निकलकर सामने आई।

• साल 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कनाडा से हाथ मिलाया और ‘ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इंटेलिजेंस नेटवर्क’ को अपनी गलती सुधारने के लिए पर महामारी की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए पूरी दुनिया में फैलाना शुरू कर दिया। खास बात यह थी कि इस समय इंटरनेट आ चुका था तो इंटरनेट का उपयोग भी इसमें किया गया जिससे कि महामारियों की सटीक जानकारी ली जा सके।

• विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2000 में ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इंटेलिजेंस नेटवर्क को ‘ग्लोबल आउटब्रेक अलर्ट रिस्पांस नेटवर्क’ के साथ जोड़ा जिससे कि स्वास्थ्य के क्षेत्र से संबंधित घटनाओं का सही विश्लेषण संभव हो सके। इसके बाद ग्लोबल आउटब्रेक अलर्ट रिस्पांस नेटवर्क ने 120 संस्थानों को डाटा लैब्स स्किल और एक्सपीरियंस के साथ जोड़ा जिससे कि कोई भी स्वास्थ्य समस्या आने पर तेजी से कार्यवाही की जा सके।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का भारत मे योगदान – WHO Contributions in India

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भारत दुनिया के सबसे बड़े, मजबूत और शक्तिशाली देशों में से एक है तो ऐसे में जाहिर सी बात है कि भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन का हिस्सा जरूर होगा। 12 जनवरी 1948 को ही भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन का हिस्सा बन गया था और यह संगठन का हिस्सा बनने वाले सबसे पहले देशों में से एक था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का दक्षिणी पूर्वी एशिया का क्षेत्रीय कार्यालय भारत की राजधानी दिल्ली में ही स्थित है। अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन के भारत में योगदान के बारे में बात की जाए तो वह कुछ इस प्रकार हैं:



चेचक के उन्मूलन में योगदान:

यह बात हम सभी को भली-भांति पता है कि चेचक की बीमारी सबसे ज्यादा भारत को ही प्रभावित किया था। एक आंकड़े के मुताबिक 1967 में भारत में चेचक के जितने मामले देखे गए थे वह विश्व के सभी मामलों के 65% थे। चेचक की बीमारी की वजह से भारत में 26,225 लोगो की म्रत्यु हुई थी।

चेचक की बीमारी को गंभीर रूप से लेते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1967 में ही ‘चेचक उन्मूलन कार्यक्रम’ की शुरुआत को थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार ने मिलकर चेचक के खिलाफ लगातार प्रयास किया और 1977 में इसका उन्मूलन किया गया।

पोलियो के उन्मूलन में योगदान:

पोलियो भारत में पहली सबसे बड़ी बीमारियों में से एक थी जिसकी वजह से आपकी समस्या देश को देखनी पड़ी। इसके उन्मूलन में भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का काफी योगदान रहा है। साल 1988 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल की शुरुआत की गई थी जिसमें वर्ल्ड बैंक के द्वारा भी आर्थिक सहायता और तकनीकी सहायता दी गयी थी।

साल 2012 में चलाए गए पोलियो अभियान में भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का योगदान था जिसमें 5 वर्ष से कम आयु वाले बच्चो के टीकाकरण हेतु लोगो को जागरूक करने पर बल दिया जा रहा था। पोलियो अभियान 2012 को सफलता भी प्राप्त हुई थी।

वैश्विक स्वास्थ्य समस्याएं और विश्व स्वास्थ्य संगठन – World Health Concerns and WHO in Hindi.

World Health Organization In Hindi

वर्तमान में काफी सारी ऐसी समस्याए विश्व के सामने आ खड़ी हुई हैं जिससे हम सभी को मिलकर लड़ना होगा। इन समस्याओं को वैश्विक स्वास्थ्य समस्याएं कहा जाता हैं जिनसे लड़ने में विश्व स्वास्थ्य संघठन बखूबी मदद कर रहा हैं। यह समस्याए और उनके निवारण हेतु में संघठन की सोच व राय कुछ इस प्रकार हैं:

• पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु प्रदूषण

इस बात में कोई दो राय नहीं हैं कि पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु प्रदूषण वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक हैं। आंकड़ों के अनुसार आज के समय में 10 में से नौ व्यक्ति प्रदूषित वायु में सांस लेते हैं।

साल 2019 में पर्यावरण और जलवायु प्रदूषण को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बयान दिया था कि पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु प्रदूषण दुनिया के लिए तेजी से आगे बढ़ते हुए खतरे हैं। 2019 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा दिए गए बयान के अनुसार वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा पर्यावरणीय जोखिम हैं।

वायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारणों में से एक जीवाश्म ईंधन को जलाना हैं, जिसकी वजह से धुआं निकलता है और पर्यावरण को नुक्सान पहुचता हैं। हवा के साथ काफी सारी छोटे-छोटे प्रदूषक फेफड़ो में जाकर ह्रदय और मस्तिष्क को नुकसान पहुचाते हैं।

इससे कैंसर, स्ट्रोक, हृदय और फेफड़ों की बीमारी होती हैं जिससे हर साल 70 लाख से अधिक लोग अचानक मर जाते हैं। आकड़ो की माने तो अगर इसी तरह से प्रदूषण बढ़ता रहा तो 2030 से 2050 तक प्रतिवर्ष कुपोषण, मलेरिया, डायरिया और हीट स्ट्रेस जैसी समस्याओं की वजह से 2.5 लाख मौत हो सकती हैं।

• गैर संग्रामक रोग

काफी सारे रोग होते हैं जो संग्रामक नहीं होते हैं लेकिन खतरनाक होते हैं। इन रोगों में मधुमेह, कैंसर एवं हृदय रोग शामिल हैं। इस तरह के रोग विश्व मे हो रही 70% म्रत्यु के जिम्मेदार होते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संघटन का कहना हैं कि तंबाकू का सेव, शरीर को अधिक काम मे ना लेना, शराब का आवश्यकता से अधिक उपयोग, बेकार खाद्य पदार्थो का सेवन और वायु प्रदूषण आदि इस तरह के गैर संग्रामक रोगों में व्रद्धि के मुख्य कारण हैं।

इसके अलावा आत्महत्या भी म्रत्यु का मुख्य कारण बन रही हैं जो 15 से 19 वर्ष के बच्चो में ज्यादा हो रही हैं जिसका मुख्य कारण डिप्रेशन और नकारात्मकता हैं। विश्व स्वास्थ्य संघटन इनको लेकर लोगोको जागरूक कर रहा हैं।

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• वैश्विक इन्फ्लूएंजा महामारी

इन्फ्लूएंजा महामारी एक गम्भीर समस्या बन सकती हैं तो ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे गंभीर रूप से लेता हैं। करीब 114 से लेकर 153 संस्थान इन्फ्लूएंजा वायरस की प्रसार की कड़ी तौर पर निगरानी कर रहे हैं। इसके साथ ही वह वायरस की प्रतिक्रिया में भी शामिल हैं।

• नाजुक और सुबेध परिस्थितिया

आकड़ो के मुताबिक दुनिया की 22% आबादी अर्थात 1.6 बिलियन लोग इस तरह के गंभीर इलाको में रहते हैं जहाँ सूखा, अकाल, संघर्ष एवं जनसंख्या विस्थापन जैसे दीर्घकालीन संकट मौजूद होते हैं। इस तरह के लोग बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहते हैं। इन लोगो तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुच सके, इसके लिये विश्व स्वास्थ्य संघटन के द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं।

• डेंगू

डेंगू विश्व मे फैली अब तक कि सबसे बड़ी बीमारियों में से एक हैं जिसने करोड़ो लोगो को शिकार बनाया हैं। डेंगू की बीमारी मच्छरों के द्वारा होती हैं और फ्लू जैसे लक्षणों का एक मुख्य कारण भी बन जाती हैं। फ्लू डेंगू से पीड़ित व्यक्तियों (रोगियों) में जानलेवा तक साबित हो सकती हैं।

मानसून के समय मे जब मच्छर बाहर प्रचुर मात्रा में निकलते हैं बांग्लादेश और भारत जैसे देशों में कई डेंगू के मामले सामने आते हैं। बांग्लादेश में दो दशकों में 2018 में बांग्लादेश में सबसे अधिक म्रत्यु हुई। नेपाल जैसे देशो में भी अब यह बीमारी फैलने लगी हैं जिन्होंने पहले कभी इसका सामना नहीं किया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा डेंगू से लड़ने के लिए एक नई रणनीति तैयार की गई हैं जिसके द्वारा विश्व मे डेंगू के प्रभाव को कम करने पर बल दिया जा रहा हैं।

• एचआईवी

एचआईवी भी विश्व की तेजी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्याओं में से एक हैं। आकड़ो के मुताबिक वर्तमान में विश्व के 3.7 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं। करीब 15 से 24 वर्ष की युवा लडकिया और महिलाए इस बीमारी से अधिक प्रभावित हो रही हैं। वर्तमान में एचआईवी के परीक्षण के क्षेत्र में काफी प्रगति देखी जा रही हैं।

करीब 2.2 करोड़ रोगियों को एंटीरेट्रोवाइरल उपचार दिया जा रहा हैं और प्री एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस जैसे निवारक उपायों तक भी उपचारक पहुच चुके हैं। WHO भी HIV के क्षेत्र में लगातार काम कर रहा हैं जिससे कि अधिक से अधिक लोगो को उनकी इस बीमारी के बारे में पता लग सके और वह तुरन्त इसका उपचार लेना शुरू कर सके।



आज हमने क्या जाना

तो यह था हमारा लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization in Hindi) पर, जिसमे हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन से सम्बंधित सभी तथ्यों पर बात की। अगर आपको इस लेख से जुड़ा हुआ कोई सवाल हैं तो कमेंट करके जरूर पूछे।



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